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पीलीभीत: देवहा नदी किनारे बाढ़ मॉक ड्रिल, प्रशासन और एसडीआरएफ ने परखी राहत-बचाव तैयारियां! मुक्तिधाम के निकट हुआ व्यापक अभ्यास, नाव, लाइफ जैकेट, सर्च लाइट, ओबीएम इंजन और रिमोट कंट्रोल लाइफ ब्वाय तकनीक का किया गया प्रदर्शन


पीलीभीत। जनपद में संभावित बाढ़ जैसी आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने और राहत एवं बचाव तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को देवहा नदी के निकट मुक्तिधाम,  में व्यापक बाढ़ मॉक एक्सरसाइज  का आयोजन किया गया। इस अभ्यास में जिला प्रशासन, तहसील प्रशासन, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग, सिंचाई विभाग, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, एसडीआरएफ, आपदा मित्रों और नागरिक सुरक्षा विभाग ने संयुक्त रूप से भाग लेकर आपसी समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया और संसाधनों की उपलब्धता का व्यावहारिक परीक्षण किया।

मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना, राहत एवं बचाव कार्यों में प्रयोग होने वाले संसाधनों की कार्यक्षमता को परखना तथा आपदा की घड़ी में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया की तैयारी सुनिश्चित करना रहा। इस दौरान बाढ़ राहत में प्रयुक्त होने वाले उपकरणों जैसे नाव, लाइफ जैकेट, सर्च लाइट, ओबीएम इंजन और संचार उपकरणों की क्रियाशीलता का परीक्षण किया गया। अधिकारियों ने मौके पर उपलब्ध संसाधनों का निरीक्षण करते हुए यह भी देखा कि आपात स्थिति में इन्हें कितनी तेजी और दक्षता के साथ उपयोग में लाया जा सकता है।अभ्यास के दौरान एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की टीम ने पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। बाढ़ की स्थिति का कृत्रिम परिदृश्य बनाकर यह दर्शाया गया कि यदि कोई ग्रामीण अथवा नागरिक नदी अथवा बाढ़ के पानी में फंस जाए, तो बचाव दल किस प्रकार तत्काल मौके पर पहुंचकर उसे सुरक्षित निकाल सकता है। एसडीआरएफ टीम के उपनिरीक्षक विशाल मौर्य और उनकी टीम के अन्य सदस्यों ने मोटर बोट तथा रिमोट कंट्रोल लाइफ ब्वाय तकनीक का प्रयोग करते हुए डूबते हुए ग्रामीणों को सुरक्षित रेस्क्यू करने का प्रदर्शन किया, जिसे मौके पर मौजूद अधिकारियों और ग्रामीणों ने गंभीरता से देखा।मॉक ड्रिल में यह भी दिखाया गया कि बचाव कार्य केवल लोगों को पानी से बाहर निकालने तक सीमित नहीं होता, बल्कि उन्हें तत्काल चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है। इसी क्रम में मेडिकल टीम द्वारा रेस्क्यू किए गए लोगों को प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) देने का अभ्यास किया गया। चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि बाढ़ जैसी स्थिति में डूबने, चोट लगने, घबराहट, संक्रमण या शारीरिक कमजोरी जैसी परिस्थितियों में तत्काल चिकित्सा सहायता किस प्रकार दी जाती है। इसके बाद पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों तक पहुंचाने की प्रक्रिया का भी अभ्यास किया गया।

मौके पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं अचानक उत्पन्न होने वाली चुनौती हैं, जिनसे निपटने के लिए केवल संसाधनों का होना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि विभागों के बीच मजबूत तालमेल, प्रशिक्षित मानव संसाधन और त्वरित निर्णय क्षमता भी जरूरी है। इस प्रकार की मॉक ड्रिल से यह समझने में मदद मिलती है कि आपदा की वास्तविक स्थिति में किस विभाग की क्या भूमिका होगी, कौन-सी एजेंसी किस स्तर पर काम करेगी और राहत कार्यों को किस प्रकार तेजी से संचालित किया जाएगा। साथ ही, इससे यह भी स्पष्ट होता है कि किसी भी आपदा में स्थानीय प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ और नागरिक स्वयंसेवकों की संयुक्त भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है।

बाढ़ मॉक अभ्यास के दौरान अपर जिलाधिकारी (वि.ध्रा.) प्रसून द्विवेदी, सिटी मजिस्ट्रेट विजय वर्धन तोमर, उपजिलाधिकारी सदर श्रद्धा सिंह, नायब तहसीलदार ऋषि मिश्रा, प्रखर सिंह, परितोष द्विवेदी, आपदा विशेषज्ञ भगवती प्रसाद सहित जनपद के विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। इसके अलावा स्थानीय ग्रामीणों की भी अच्छी भागीदारी देखने को मिली। ग्रामीणों को आपदा के समय अपनाई जाने वाली सावधानियों, सुरक्षित स्थानों पर जाने, प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने और अफवाहों से बचने के बारे में भी जागरूक किया गया।

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