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प्रतापगढः गोसेवा आयोग सदस्य की अध्यक्षता में जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन समिति की बैठक सम्पन्न! गोसेवा आयोग के सदस्य ने अनुपस्थित अधिकारियों के वेतन रोकने व कारण बताओ नोटिस जारी करने का दिया निर्देश


प्रतापगढ़। जिले में उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के सदस्य रमाकान्त उपाध्याय की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले की गौशालाओं की व्यवस्थाओं, गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़ी योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। इस अवसर पर जिलाधिकारी अभिषेक पाण्डेय, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. राममोहन मीना, भाजपा जिलाध्यक्ष आशीष श्रीवास्तव, भाजपा के शिव प्रकाश मिश्र सेनानी सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी, खंड विकास अधिकारी एवं नगरीय निकायों के अधिशासी अधिकारी, पशु चिकित्साकधारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान ईओ नगर पंचायत कटरा मेंदनीगंज, ईओ नगर पंचायत पट्टी व अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत अनुपस्थित पाये गये जिस पर गोसेवा आयोग के सदस्य ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुये सम्बन्धित का वेतन रोकने एवं कारण बताओ नोटिस जारी करने हेतु निर्देशित किया।

बैठक में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा0 राम शब्द ने बताया कि जनपद में कुल 75 गो-आश्रय स्थल संचालित हैं, जिनमें 59 अस्थायी गो-आश्रय स्थल, 2 कांजी हाउस, 8 वृहद गो-संरक्षण केंद्र तथा 6 कान्हा गौशालाएं शामिल हैं। समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि दो गौशालाओं में अभी तक सीसीटीवी कैमरे स्थापित नहीं किए गए हैं। इस पर गोसेवा आयोग के सदस्य ने संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि एक सप्ताह के भीतर सीसीटीवी कैमरे अवश्य लगा दिये जाये। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जनपद में अब तक 2426 गोवंश लाभार्थियों को सुपुर्द किए जा चुके हैं तथा अप्रैल 2026 तक की अनुदान राशि का भुगतान किया जा चुका है। इस पर गोसेवा आयोग के सदस्य ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को समयबद्ध ढंग से भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि पूर्व में गौशालाओं में गोबर से पेंट निर्माण का कार्य किया जाता था, जो वर्तमान में बंद है। इस पर गोसेवा आयोग के सदस्य ने गोबर आधारित पेंट निर्माण कार्य को पुनः शुरू कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे गौशालाओं को अतिरिक्त आय का स्रोत प्राप्त होगा और गोबर के बेहतर उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। गोसेवा आयोग के सदस्य ने नगरीय निकायों की गौशालाओं में बीमार एवं अशक्त गोवंशों के उपचार के लिए ‘काऊ लिफ्टर’ की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कई बार बीमार पशु खड़े नहीं हो पाते, ऐसे में काऊ लिफ्टर की सहायता से उनका समुचित उपचार किया जा सकेगा।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी अभिषेक पाण्डेय ने मुख्य विकास अधिकारी को निर्देशित किया कि विद्यालयों के विद्यार्थियों को प्रत्येक माह गौशालाओं का भ्रमण कराया जाए। भ्रमण के दौरान बच्चों को गोवंशों को गुड़ एवं रोटी खिलाने के लिए प्रेरित किया जाए, जिससे उनके भीतर पशु संरक्षण और गौसेवा के संस्कार विकसित हो सकें। सदस्य ने सभी खंड विकास अधिकारियों एवं नगरीय निकायों के अधिशासी अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि गौशालाओं में चारा, भूसा, पानी, चूनी-चोकर तथा अन्य आवश्यक संसाधनों की स्वच्छ एवं पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। गोवंशों के स्वास्थ्य, पोषण एवं देखभाल में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों से गौवंशों के कल्याण हेतु संचालित योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गोसेवा आयोग द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का निर्धारित समयसीमा में अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि गौमाता भारतीय संस्कृति और परंपरा की महत्वपूर्ण धरोहर हैं तथा उनकी सेवा और संरक्षण हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

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