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पीलीभीतः चेक बाउंस मामले में एक साल की सजा, डेढ़ लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने का आदेश! फास्ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसलारू उधार लेकर दिया था चेक, खाते में रकम न होने से हुआ था अनादरित


पीलीभीत। चेक बाउंस (चेक अनादरण) के एक महत्वपूर्ण मामले में सिविल जज सीनियर डिवीजन एवं फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश समाली मित्तल ने आरोपी को दोषी करार देते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी को न केवल जेल भेजने का आदेश दिया, बल्कि पीड़ित को चेक की पूरी धनराशि डेढ़ लाख रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित दो माह के भीतर अदा करने के भी निर्देश दिए हैं।

जानकारी के अनुसार नगर के जोशी टोला निवासी लालता प्रसाद के पुत्र प्रमोद कुमार राठौर के विरुद्ध थाना जहानाबाद क्षेत्र के ललौरीखेड़ा निवासी जयप्रकाश पुत्र टीकाराम ने वर्ष 2021 में न्यायालय में परिवाद दायर किया था। शिकायत में कहा गया कि मार्च 2018 में प्रमोद कुमार राठौर ने बैंक में मार्जिन मनी जमा करने की आवश्यकता बताते हुए जयप्रकाश से डेढ़ लाख रुपये उधार लिए थे। उस समय उन्होंने आश्वासन दिया था कि बैंक से ऋण स्वीकृत होते ही मात्र 15 दिनों के भीतर पूरी रकम वापस कर देंगे।

परिवादी के अनुसार समय बीतने के बावजूद आरोपी ने धनराशि वापस नहीं की। कई बार तकादा करने और रकम लौटाने की मांग करने पर आरोपी ने बैंक ऑफ बड़ौदा का डेढ़ लाख रुपये का चेक दिया। जब उक्त चेक को भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत किया गया तो खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण चेक अनादरित (बाउंस) हो गया।

चेक बाउंस होने के बाद पीड़ित ने कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए न्यायालय की शरण ली। मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने, दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण करने तथा उपलब्ध प्रमाणों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने आरोपी प्रमोद कुमार राठौर को दोषी पाया।

फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश समाली मित्तल ने अपने निर्णय में आरोपी को एक वर्ष के साधारण कारावास से दंडित किया। इसके साथ ही आदेश दिया कि आरोपी परिवादी को चेक की मूल धनराशि 1.50 लाख रुपये तथा उस पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज परिवाद दाखिल होने की तिथि से जोड़कर प्रतिकर स्वरूप दो माह के भीतर अदा करे।

इस फैसले को वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। न्यायालय के इस निर्णय से स्पष्ट संदेश गया है कि किसी व्यक्ति को दिया गया चेक केवल कागजी औपचारिकता नहीं बल्कि एक कानूनी दायित्व है। यदि खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण चेक बाउंस होता है तो संबंधित व्यक्ति को कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

स्थानीय अधिवक्ताओं का कहना है कि चेक अनादरण के मामलों में न्यायालयों द्वारा लगातार सख्त रुख अपनाया जा रहा है, जिससे आर्थिक अपराधों पर अंकुश लगाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने में मदद मिल रही है। यह फैसला ऐसे लोगों के लिए भी चेतावनी है जो उधार लेकर भुगतान के लिए चेक तो जारी कर देते हैं, लेकिन खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं रखते।

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