पीलीभीत। भारतीय जनता पार्टी के तत्वावधान में वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल की 51वीं स्मृति पर “संविधान हत्या दिवस” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय बताते हुए लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने आपातकाल के दौर को याद करते हुए कांग्रेस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और विरोध की आवाज को कुचलने का आरोप लगाया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्रों पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। बैठक की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य ने की, जबकि संचालन जिला उपाध्यक्ष नमन प्रताप राजपूत ने किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य ने कहा कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला था। उन्होंने कहा कि उस समय कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र की हत्या करने का काम किया और आपातकाल के विरोध में उठने वाली आवाजों को दबाने के लिए व्यापक स्तर पर दमन और अत्याचार किए गए। उन्होंने कहा कि देश की जनता ने उस दौर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला, राजनीतिक विरोधियों की गिरफ्तारी और संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग को देखा।
बरखेड़ा विधायक स्वामी प्रवक्तानंद ने अपने संबोधन में लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि आज देश और प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले उन सेनानियों की देन है, जिन्होंने शारीरिक और मानसिक यातनाएं सहने के बावजूद लोकतंत्र की आवाज को दबने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के संघर्ष को देश हमेशा याद रखेगा।
आपातकाल के दौर की परिस्थितियों को याद करते हुए लोकतंत्र रक्षक सेनानी पूरनलाल गंगवार ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि वह समय अत्यंत संकटपूर्ण था, चारों ओर भय और दमन का माहौल था। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध करने पर तत्कालीन शासन के निर्देश पर पुलिस ने उन पर क्रूरता की हदें पार कर दी थीं। उन्होंने बताया कि उन पर लाठियां बरसाई गईं, गंभीर चोटें पहुंचाई गईं और उन्हें जेल में डाल दिया गया। उन्होंने कहा कि वह दौर लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों के लिए सबसे कठिन समय था।
डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि आपातकाल के दौरान पुलिस और प्रशासन को मनमानी करने की खुली छूट मिली हुई थी। निर्दोष लोगों को जेलों में ठूंसा जा रहा था और समाज में भय का ऐसा वातावरण बना दिया गया था कि कोई भी खुलकर अपनी बात नहीं कह सकता था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज का सम्मान होना चाहिए, लेकिन उस दौर में असहमति को अपराध बना दिया गया था।
कैलाश चंद्र गुप्ता ने कहा कि आपातकाल का समय स्वतंत्रता संग्राम से भी अधिक पीड़ादायक था। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई विदेशी हुकूमत के खिलाफ थी, लेकिन आपातकाल के समय लोकतंत्र की लड़ाई अपने ही शासन के दमन के खिलाफ लड़नी पड़ी। उन्होंने कहा कि इस काले अध्याय को देश की नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि भविष्य में फिर कभी लोकतंत्र पर ऐसा हमला न हो सके।
कार्यक्रम के दौरान भाजपा की ओर से जनपद के लोकतंत्र रक्षक सेनानियों का सम्मान भी किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता और लोकतंत्र रक्षक सेनानी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पूरनलाल गंगवार, सरबजीत सिंह, सरयू प्रसाद रस्तोगी, कैलाश चंद्र गुप्ता, डॉ. धीरेंद्र सिंह, डॉ. वीरेंद्र कुमार, डॉ. योगेश चंद्र मिश्रा, डॉ. सुधीर मिश्रा, बांकेलाल, नेतराम, अरुण बाजपेयी, रमेश सिंह, सर्वेश चंद्र द्विवेदी, सालिगराम, प्रमोद कुमार, राजीव कुमार, जिला महामंत्री मंगली प्रसाद वर्मा, जिला उपाध्यक्ष अनुराग अग्निहोत्री, लेखराज भारती, रेखा सिंह परिहार, जिला मंत्री विकास वाल्मीकि, अमित कुशवाहा, सत्यपाल वर्मा, जिला मीडिया प्रभारी अभिमन्यु गंगवार, जिला आईटी संयोजक हरिओम शर्मा, जिला सह मीडिया प्रभारी दीपक सोनकर, जिला सह कार्यालय मंत्री रामचरन लाल राठौर, किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष महेश वर्मा, मंडल अध्यक्ष प्यारे लाल कश्यप, मंडल प्रभारी हर्षित चैधरी, अनूप वाल्मीकि, विवेक शुक्ला, नंदलाल, विवेक पांडे और हेमराज दिवाकर सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
