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पीलीभीतः जनपद में बालश्रम के खिलाफ चला रेस्क्यू अभियान, 4 बाल श्रमिकों को कराया गया मुक्त! जिलाधिकारी के निर्देश पर श्रम विभाग, जिला प्रोबेशन विभाग चाइल्ड हेल्पलाइन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई


पीलीभीत। जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के निर्देश पर जनपद  में बालश्रम उन्मूलन को लेकर सोमवार को शहर क्षेत्र में व्यापक रेस्क्यू अभियान चलाया गया। यह अभियान जिला प्रोबेशन अधिकारी के सहयोग से तथा श्रम प्रवर्तन अधिकारी शशिकला के निर्देशन में संचालित किया गया। अभियान के दौरान शहर के विभिन्न प्रतिष्ठानों,मैकेनिक शॉप, होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों, कपड़ों की दुकानों, किराना स्टोर, स्टील वर्क्स समेत अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों,पर सघन निरीक्षण और जांच की गई। संयुक्त टीम ने छापेमारी और सत्यापन की कार्रवाई करते हुए कुल 04 बाल श्रमिकों को चिन्हित किया, जिन्हें बालश्रम से अवमुक्त कराया गया।अधिकारियों के अनुसार अभियान का मुख्य उद्देश्य न केवल बाल श्रमिकों की पहचान कर उन्हें कार्यस्थलों से मुक्त कराना था, बल्कि बालश्रम के प्रति समाज, अभिभावकों और सेवायोजकों को जागरूक करना भी था। टीम ने विभिन्न दुकानों और प्रतिष्ठानों पर जाकर बच्चों की आयु, कार्य की प्रकृति और उनके पारिवारिक हालात की जानकारी जुटाई। जिन बच्चों को श्रम में संलिप्त पाया गया, उन्हें तत्काल रेस्क्यू कर आवश्यक कार्रवाई के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया।बाल कल्याण समिति ने सभी बच्चों और उनके परिजनों की बात सुनने के बाद अभिभावकों को सख्त हिदायत दी कि भविष्य में बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम न कराया जाए। समिति ने यह स्पष्ट किया कि बच्चों का स्थान विद्यालय और सुरक्षित वातावरण है, न कि श्रमस्थल। समिति की ओर से सभी बच्चों को आवश्यक समझाइश देने के बाद उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि भविष्य में बच्चे दोबारा किसी व्यावसायिक कार्य में संलग्न पाए गए, तो संबंधित अभिभावकों और सेवायोजकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।अभियान के दौरान अधिकारियों ने बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 के प्रावधानों की भी जानकारी दी। बताया गया कि खतरनाक प्रक्रिया या प्रतिबंधित परिस्थितियों में बाल श्रमिकों को काम पर लगाए जाने की स्थिति में दोषी पाए जाने वाले सेवायोजकों के खिलाफ एक वर्ष तक की सजा, 50 हजार रुपये तक का जुर्माना, अथवा दोनों से दंडित किए जाने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक बाल श्रमिक के मामले में 20 हजार रुपये प्रति बाल श्रमिक की वसूली चाइल्ड लेबर वेलफेयर फंड के लिए अलग से की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी बाल श्रमिक के माता-पिता को पहली बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद वे पुनः अपने बच्चों को व्यवसायिक कार्य में लगाते हैं, तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।संयुक्त टीम ने अभियान के दौरान कई प्रतिष्ठानों पर संचालकों से पूछताछ की और उन्हें बालश्रम से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी देते हुए चेतावनी भी दी। अधिकारियों ने कहा कि बच्चों से श्रम कराना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि उनके बचपन, शिक्षा और भविष्य के साथ गंभीर अन्याय भी है। ऐसे बच्चों को विद्यालय, पोषण, सुरक्षा और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना समाज और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से जिला प्रशासन समय-समय पर ऐसे रेस्क्यू अभियान चलाकर बालश्रम पर रोक लगाने की दिशा में लगातार कार्रवाई कर रहा है।

इस संयुक्त अभियान में श्रम प्रवर्तन अधिकारी भूरेलाल, चाइल्ड हेल्पलाइन परियोजना समन्वयक निर्वान सिंह, विशेष किशोर पुलिस इकाई प्रभारी निरीक्षक अर्जुन सिंह, कांस्टेबल अमित, कांस्टेबल मनीष तथा महिला कांस्टेबल संध्या सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि बालश्रम उन्मूलन के लिए आगे भी शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के निरीक्षण एवं रेस्क्यू अभियान जारी रहेंगे, ताकि किसी भी बच्चे का बचपन मजदूरी की भेंट न चढ़े और उसे शिक्षा तथा सुरक्षित जीवन का अधिकार मिल सके।

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