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रूद्रपुर: जल जीवन मिशन पर बड़ा सवालरू कागजों में 37 गांवों में कार्य पूरा, अधिकारियों की जानकारी में सिर्फ 4 गांव! सहायक अभियंता ने कहा- इस विषय में कोई जानकारी नहीं , जेई ने गिनाए केवल चार गांवय विभागीय रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर


उधम सिंह नगर/गदरपुर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण परिवार तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाना है, अब सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। गदरपुर विकासखंड में विभागीय रिकॉर्ड और अधिकारियों के बयानों में बड़ा विरोधाभास सामने आया है, जिससे योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पत्रकार द्वारा प्राप्त उत्तराखंड पेयजल निगम, निर्माण शाखा, उधम सिंह नगर के आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार गदरपुर विकासखंड में जल जीवन मिशन के अंतर्गत 30 योजनाएं स्वीकृत हैं। इन योजनाओं की कुल स्वीकृत लागत 10,845.44 लाख रुपये है, जिनके माध्यम से 47 राजस्व गांवों और 17,274 एफएचटीसी (घरेलू नल कनेक्शन) को लाभान्वित किया जाना है।


दस्तावेज में यह भी उल्लेख है कि इनमें से 23 योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। इन पूर्ण योजनाओं पर 8,378.71 लाख रुपये खर्च किए जाने का दावा किया गया है और 37 राजस्व गांवों में 13,701 एफएचटीसी का कार्य पूरा दिखाया गया है। वहीं 7 योजनाएं निर्माणाधीन बताई गई हैं, जिनकी लागत 2,466.73 लाख रुपये है और जिनमें 10 गांवों के 3,573 एफएचटीसी शामिल हैं। लेकिन जब इस संबंध में सहायक अभियंता सुभाष से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें इस विषय में कोई जानकारी नहीं है और जानकारी के लिए संबंधित कनिष्ठ अभियंता (जेई) से संपर्क करने को कहा इसके बाद जब जेई से योजना की प्रगति के बारे में जानकारी ली गई तो उन्होंने केवल पिपलिया, धनपुर, विजयपुर और बूरानगर गांवों में ही जल जीवन मिशन का कार्य पूर्ण होने की जानकारी दी।

यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। यदि विभागीय रिकॉर्ड में 37 गांवों में कार्य पूर्ण दर्शाया गया है, तो संबंधित अधिकारी केवल चार गांवों का ही नाम क्यों बता पाए? क्या अधिकारियों को अपने ही विभाग की योजनाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं है, या फिर विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़े और जमीनी हकीकत अलग-अलग कहानी बयां कर रहे हैं? यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जल जीवन मिशन पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ऐसे में यदि रिकॉर्ड और अधिकारियों के बयानों में इतना बड़ा अंतर है, तो योजना की गुणवत्ता, प्रगति और खर्च की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग इस विरोधाभास पर सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखे और स्पष्ट करे कि आखिर 37 गांवों में कार्य पूर्ण होने का दावा किस आधार पर किया गया है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी केवल चार गांवों की जानकारी ही दे पा रहे हैं। यदि दस्तावेजों में दर्ज आंकड़े सही हैं तो सभी पूर्ण गांवों की सूची सार्वजनिक की जानी चाहिए, और यदि अधिकारियों की जानकारी सही है तो विभागीय रिकॉर्ड की जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि जनता तक सही जानकारी पहुंचे और सरकारी धन का उपयोग प्रभावी ढंग से हो सके।।

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