पीलीभीत। जनपद में बाल विवाह रोकथाम को लेकर चाइल्ड हेल्पलाइन और पुलिस की सतर्कता एक बार फिर कारगर साबित हुई। बुधवार को थाना गजरौला क्षेत्र के एक गांव में प्रस्तावित नाबालिग बालिका के बाल विवाह को समय रहते रुकवा दिया गया। शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन, चाइल्ड हेल्पलाइन और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और बालिका की सगाई की तैयारी रुकवाते हुए परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 के प्रावधानों की जानकारी दी।जानकारी के अनुसार, गांव में एक नाबालिग बालिका का विवाह कराए जाने की सूचना किसी जागरूक व्यक्ति द्वारा चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर दी गई थी। शिकायत प्राप्त होते ही जिला प्रोबेशन अधिकारी अनुराग श्याम रस्तोगी के निर्देश पर परियोजना समन्वयक चाइल्ड हेल्पलाइन निर्वान सिंह तथा एसजेपीयू प्रभारी निरीक्षक गोविंद सिंह, थाना पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की पड़ताल की।
मौके पर पहुंची टीम को बालिका के माता-पिता ने बताया कि उनकी पुत्री का विवाह आगामी 8 जुलाई 2026 को प्रस्तावित है। हालांकि जांच के दौरान टीम ने पाया कि बालिका की सगाई की तैयारियां उसी दिन चल रही थीं और सगाई की रस्म कुछ ही देर में संपन्न कराई जानी थी। बालिका के हाथों में मेहंदी भी लगाई जा चुकी थी, जिससे स्पष्ट था कि परिजन विवाह प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी में थे। टीम ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए सगाई की रस्म रुकवाई और परिजनों से आवश्यक पूछताछ की।
बालिका की काउंसलिंग के दौरान उसने बताया कि उसने इसी वर्ष कक्षा 10 उत्तीर्ण की है और वह आगे पढ़ाई जारी रखना चाहती है, लेकिन उसके परिजन उसकी इच्छा के विरुद्ध विवाह कराने की तैयारी कर रहे थे। बालिका की बात सुनने के बाद टीम ने मामले को गंभीरता से लिया और परिजनों को समझाया कि बालिका की आयु अभी 18 वर्ष से कम है, इसलिए उसका विवाह कराना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है।संयुक्त टीम ने परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के बारे में विस्तार से जानकारी दी और स्पष्ट किया कि नाबालिग बालिका का विवाह कराना दंडनीय अपराध है। टीम ने यह भी बताया कि यदि बाल विवाह कराया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। कानूनी प्रावधानों और संभावित कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद बालिका के परिजन बाल विवाह न करने के लिए सहमत हो गए।
यह कार्रवाई ग्राम स्तरीय बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति के अध्यक्षध्ग्राम प्रधान प्रतिनिधि की उपस्थिति में कराई गई, ताकि भविष्य में दोबारा ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने परिवार को यह भी समझाया कि बालिका की शिक्षा और सुरक्षा सर्वोपरि है तथा उसे आगे पढ़ने का अवसर दिया जाना चाहिए।
अधिकारियों के अनुसार, बालिका को अग्रिम कार्यवाही के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जहां उसकी सुरक्षा, शिक्षा और भविष्य को ध्यान में रखते हुए आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले तो तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पुलिस या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर नाबालिग बच्चों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।बाल विवाह रोकने की इस कार्रवाई को जिले में बाल संरक्षण व्यवस्था की सक्रियता के रूप में देखा जा रहा है। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के बीच प्रशासन की यह पहल न केवल एक नाबालिग बालिका के भविष्य को सुरक्षित करने वाली साबित हुई, बल्कि समाज को यह संदेश भी देती है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ अब कानून और व्यवस्था दोनों पूरी तरह सजग हैं।
