Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS
ऑनलाइन भुगतान करें
Pay Now

रुद्रपुर: रजिस्ट्रार कार्यालय में भ्रष्टाचार का खेल? हर रजिस्ट्री पर 1 से 2 प्रतिशत तक कथित अवैध वसूली के आरोप, रकम न देने वालों की फाइलों में निकाली जा रही खामियां



जिला मुख्यालय के महत्वपूर्ण कार्यालय पर गंभीर सवाल, आम जनता परेशानय मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम को लग रहा झटका

रुद्रपुर। उत्तराखंड सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने और सरकारी तंत्र को पारदर्शी बनाने के लगातार दावे कर रही है। मुख्यमंत्री स्वयं कई मंचों से अधिकारियों और कर्मचारियों को ईमानदारी के साथ कार्य करने तथा भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई की चेतावनी दे चुके हैं। इसके बावजूद उधम सिंह नगर जिला मुख्यालय रुद्रपुर स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय को लेकर सामने आ रहे आरोप सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कार्यालय में रजिस्ट्री कराने आने वाले लोगों का आरोप है कि यहां लंबे समय से कथित तौर पर अवैध वसूली का संगठित खेल चल रहा है और बिना ष्सुविधा शुल्कष् के आम नागरिकों का काम समय पर होना मुश्किल हो गया है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जमीन, मकान, दुकान और अन्य संपत्तियों की रजिस्ट्री कराने आने वाले लोगों से कथित तौर पर हर रजिस्ट्री पर एक से दो प्रतिशत तक अतिरिक्त रकम की मांग की जाती है। आरोप है कि यह रकम सरकारी शुल्क का हिस्सा नहीं होती, बल्कि काम को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के नाम पर वसूली जाती है। कई लोगों का दावा है कि जो व्यक्ति कथित मांग पूरी कर देता है, उसकी फाइल तेजी से आगे बढ़ जाती है, जबकि रकम देने से इनकार करने वालों की फाइलों में विभिन्न प्रकार की आपत्तियां लगाकर प्रक्रिया को जटिल बना दिया जाता है।

पिछले कुछ समय से रुद्रपुर का रजिस्ट्रार कार्यालय आम लोगों, संपत्ति कारोबारियों और दस्तावेज लेखकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कार्यालय में आने वाले लोगों का कहना है कि यहां काम कराने के लिए केवल निर्धारित सरकारी प्रक्रिया का पालन करना पर्याप्त नहीं रह गया है। आरोप है कि कुछ मामलों में आवेदकों को बार-बार नए दस्तावेज लाने, त्रुटियां सुधारने और अलग-अलग औपचारिकताओं का हवाला देकर परेशान किया जाता है। कई लोगों का कहना है कि जब तक कथित तौर पर अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाता, तब तक फाइल किसी न किसी कारण से अटकती रहती है। इससे दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ समय और मानसिक तनाव भी झेलना पड़ता है।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, रजिस्ट्री प्रक्रिया के दौरान कई बार ऐसी आपत्तियां लगाई जाती हैं जिन्हें आसानी से मौके पर दूर किया जा सकता है। लेकिन आरोप है कि इन आपत्तियों को आधार बनाकर फाइलों को लंबित रखा जाता है। लोगों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति कथित व्यवस्था के अनुरूप चलने को तैयार नहीं होता तो उसके दस्तावेजों में बार-बार कमियां निकाली जाती हैं। कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि कई बार फाइल पूरी तरह सही होने के बावजूद तकनीकी या प्रक्रिया संबंधी बहाने बनाकर उसे रोका जाता है। इससे आम नागरिक स्वयं को बेबस महसूस करता है और अंततः अपना काम कराने के लिए कथित तौर पर अतिरिक्त भुगतान करने को मजबूर हो जाता है।

रजिस्ट्री पहले से ही एक महंगी प्रक्रिया मानी जाती है, जिसमें स्टांप शुल्क, पंजीकरण शुल्क और अन्य सरकारी शुल्क शामिल होते हैं। ऐसे में यदि लोगों को निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त भी रकम खर्च करनी पड़े तो इसका सीधा असर उनकी जेब पर पड़ता है। मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के लिए यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ और अधिक कठिनाई पैदा करता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई लोग अपनी जीवन भर की जमा पूंजी लगाकर जमीन या मकान खरीदते हैं। ऐसे में रजिस्ट्री के समय यदि उनसे कथित तौर पर अतिरिक्त धनराशि मांगी जाती है तो यह उनके लिए गंभीर चिंता का विषय बन जाता है।

रजिस्ट्रार कार्यालय में कथित अवैध वसूली के आरोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि ऐसी गतिविधियां वास्तव में हो रही हैं तो क्या यह सब संबंधित अधिकारियों की जानकारी के बिना संभव है? लोगों का कहना है कि जिला मुख्यालय के इतने महत्वपूर्ण कार्यालय में यदि लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही हैं तो इसकी गहन जांच होना आवश्यक है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कार्यालय में एक ऐसी कार्यशैली विकसित हो गई है जिसमें आम नागरिक की सुविधा से अधिक कथित आर्थिक लाभ को प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठ रही शिकायतों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।

उत्तराखंड सरकार लगातार भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने की बात करती रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कई बार सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं कि भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार की ओर से कई विभागों में कार्रवाई भी की गई है। ऐसे में यदि जिला मुख्यालय के एक महत्वपूर्ण कार्यालय को लेकर इस प्रकार की शिकायतें सामने आती हैं तो यह सरकार की छवि और उसकी भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी यह चर्चा का विषय बनता जा रहा है कि यदि आरोपों में सच्चाई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। लोगों का मानना है कि भ्रष्टाचार के आरोपों की अनदेखी से जनता का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है।

स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या बिचैलिए की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए लोगों का यह भी सुझाव है कि रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की मानवीय हस्तक्षेप आधारित अनियमितता की संभावना कम हो सके कार्यालय में सीसीटीवी निगरानी, ऑनलाइन शिकायत पोर्टल और समयबद्ध निस्तारण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की भी मांग की जा रही है।

रुद्रपुर रजिस्ट्रार कार्यालय को लेकर सामने आ रहे आरोपों ने आम जनता के बीच असंतोष का माहौल पैदा कर दिया है। लोग अब यह जानना चाहते हैं कि शासन और प्रशासन इन शिकायतों को कितना गंभीरता से लेते हैं और क्या वास्तव में मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक कार्यालय का मामला नहीं होगा, बल्कि सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का आधार भी बन सकता है। फिलहाल, रजिस्ट्री कराने आने वाले लोगों की निगाहें शासन और प्रशासन की ओर टिकी हुई हैं। जनता को उम्मीद है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी, ताकि सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जनता का विश्वास कायम रह सके।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |