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लिव-इन पार्टनर लौट गई पति के पास, फिर शख्स ने कोर्ट से कहा- वह परेशान है, कुछ कीजिए


हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक Habeas Corpus याचिका खारिज कर दी, जिसमें शख्स ने एक शादीशुदा महिला को रिलीज करने की डिमांड की थी। सुनवाई के दौरान, यह भी बात पता चली कि याचिका दायर करने वाला यह शख्स, कथित तौर पर महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह चुका था।

बार एंड बेंच में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की बेंच ने 14 मई को दिए गए ऑर्डर में कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य ही नहीं है, क्योंकि वह शादीशुदा महिला, पति और बच्चे के साथ रह रही है। हाईकोर्ट ने कहा कि वह इस याचिका के माध्यम से पति-पत्नी के वैवाहिक विवादों में दखल नहीं दे सकती है।

हाईकोर्ट ने कहा, 'यह याचिका वर्तमान स्वरूप में सुनवाई के योग्य नहीं है, क्योंकि कथित रूप से बंदी महिला अपने पति के साथ रह रही है। ऐसे में इस कोर्ट के लिए यह उचित नहीं है कि वह महिला और उसके पति के बीच वैवाहिक मुद्दों में हस्तक्षेप करे।'

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने यह भी कहा, 'याचिकाकर्ता और महिला के बीच जो कथित रिलेशन है, वह Adulterous प्रतीत होता है और ऐसे रिश्ते को न्यायिक मान्यता नहीं दे सकते।'

दरअसल, याचिकाकर्ता ने कोर्ट में खुद को महिला का करीबी दोस्त बताया था। उसने आरोप लगाया कि उसके पास महिला के भेजे हुए मैसेज हैं, जिसमें उसने बताया कि वह अपने पति और सास से डरी हुई है। शख्स ने इन्हीं आरोपों के आधार पर हिमाचल हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दावा किया था कि महिला को उसके पति और सास ने अवैध तरीके से बंधक बनाकर रखा हुआ है।

हालांकि, कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब बेंच ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या उसका महिला के साथ कोई शारीरिक संबंध था। तो उसने बताया कि वे दोनों कथित रूप से लिव-इन रिलेशनशिप में थे। इस मामले में 17 दिसंबर, 2025 का एक कथित एग्रीमेंट भी पेश किया गया।

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