पीलीभीत। जनपद की कलीनगर तहसील क्षेत्र स्थित बूंदीभूड़ गांव में शराब की दुकान खुलवाने को लेकर शुरू हुआ विरोध अब बड़े कानूनी विवाद में बदल गया है। प्रशासनिक एवं पुलिस टीम पर हमले, पथराव और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में पुलिस ने 58 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। घटना के बाद गांव में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है, जिसके चलते भारी पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।जानकारी के अनुसार आबकारी विभाग की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने 43 लोगों को नामजद किया है, जबकि 15 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। बताया जा रहा है कि प्रशासन, पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ई-लॉटरी के माध्यम से आवंटित देशी एवं कंपोजिट मदिरा की दुकानों को खुलवाने के लिए बूंदीभूड़ गांव पहुंची थी।
गांव में शराब की दुकान खुलने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए। महिलाओं और पुरुषों ने एक स्वर में शराब की दुकान का विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया और ग्रामीणों ने प्रशासनिक टीम के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। आरोप है कि कुछ लोगों ने लाठी-डंडे और पत्थर उठा लिए, जिससे माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया।स्थिति तब और बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों ने शराब की पेटियां और बीयर की केन सड़क पर फेंककर तोड़ दीं। इसके बाद प्रशासनिक टीम पर जमकर पथराव किया गया, जिससे मौके पर भगदड़ जैसे हालात बन गए। पथराव में तहसीलदार वीरेंद्र कुमार घायल हो गए, जबकि चैकी इंचार्ज सैफ खान के पैर में फ्रैक्चर होने की बात सामने आई है। इसके अलावा सरकारी बस और दो बोलेरो वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
घटना के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (ठछै) की कई गंभीर धाराओं और आबकारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मुकदमे में सरिता, मंजू देवी, बबीता समेत कई महिलाओं और पुरुषों के नाम शामिल किए गए हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि घटना से जुड़े वीडियो और फोटो फुटेज की गहन जांच की जा रही है तथा अन्य आरोपियों की पहचान भी की जा रही है।थाना अध्यक्ष अशोक पाल ने स्पष्ट कहा कि सरकारी कार्य में बाधा डालने और उपद्रव फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी। फिलहाल गांव में लगातार पुलिस निगरानी रखी जा रही है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।घटना के बाद क्षेत्र में शराब की दुकान खोले जाने को लेकर बहस और तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के बीच शराब की दुकान खुलने से सामाजिक माहौल खराब होगा, जबकि प्रशासन का तर्क है कि दुकान का आवंटन शासन की निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया गया है। फिलहाल बूंदीभूड़ गांव में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है।
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