रामपुर। इफको द्वारा शुक्रवार को जनपद रामपुर के उर्वरक विक्रेताओं के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में इफको मेरठ कार्यालय के उप महाप्रबंधक बृजवीर सिंह ने किसानों द्वारा यूरिया के असंतुलित उपयोग पर चिंता जताते हुए संतुलित उर्वरक प्रयोग और जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि वर्तमान कृषि पद्धति में जैविक कार्बन लगातार घट रहा है, जिससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता और फसल उत्पादकता प्रभावित हो रही है। उन्होंने हरी खाद और इफको निर्मित जैव उर्वरकों के उपयोग के फायदे विस्तार से बताए।
बृजवीर सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक मानकों के अनुसार प्रति किलोग्राम पोटाश पर चार किलोग्राम यूरिया का उपयोग होना चाहिए, लेकिन किसान 14 किलोग्राम तक यूरिया का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरक उपयोग क्षमता प्रभावित हो रही है। उन्होंने विक्रेताओं को किसानों को नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के सही उपयोग के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए।
उन्होंने बताया कि पहली टॉप ड्रेसिंग के 20 से 30 दिन बाद नैनो यूरिया का स्प्रे लाभकारी होता है। साथ ही खड़ी फसल में फास्फेटिक उर्वरकों के बजाय नैनो डीएपी के उपयोग की सलाह दी। बीज उपचार में नैनो डीएपी के प्रयोग से अंकुरण और जड़ों के विकास में तेजी आने की जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला कृषि अधिकारी कुलदीप सिंह राणा ने उर्वरक विक्रेताओं को शासन के निर्देशों का पालन करते हुए किसानों को फार्मर्स रजिस्ट्री के आधार पर ही उर्वरक वितरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रति हेक्टेयर निर्धारित मात्रा के अनुसार ही यूरिया और फास्फेटिक उर्वरकों का वितरण किया जाए तथा बिक्री केवल पीओएस मशीन के माध्यम से की जाए।
इफको उप क्षेत्र प्रबंधक जे.एस. रावत ने इफको संकट हरण दुर्घटना बीमा योजना की जानकारी देते हुए बताया कि अनुदानित उर्वरकों और नैनो उर्वरकों की बिक्री पर किसानों को एक वर्ष के लिए निशुल्क दुर्घटना बीमा सुविधा दी जाती है।
कार्यक्रम में उर्वरक बिक्री सहायक निशांत सांगवान, विशाल गौड़, रोहित कुमार समेत जनपद के लगभग 80 इफको उर्वरक विक्रेताओं ने प्रतिभाग किया।
