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पीलीभीतः योगीराज में शिक्षा की गरिमा तार-ताररू मिड डे मील बनवाने में झोंकी गईं मासूम बालिकाएं! विद्यालय में बच्चों से रसोई का कार्य करना नियमों का उल्लघंन, जिम्मेदारों पर गाज गिरना तय


पीलीभीत। जनपद के मरौरी ब्लॉक क्षेत्र स्थित मीरापुर प्राइमरीध्कंपोजिट विद्यालय से सामने आया एक सोशल मीडिया पर  वीडियो शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। वायरल वीडियो में विद्यालय की छात्राओं को मिड डे मील के तहत खाना बनाते, पूड़ी बेलते हुए साफ देखा जा सकता है, जबकि वहीं मौजूद शिक्षिका बच्चों को प्रोत्साहित करती नजर आ रही हैं। यह दृश्य न केवल शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि शासन की मंशा के भी विपरीत है।बताया जा रहा है कि विद्यालय में मिड डे मील तैयार करने के लिए शासन द्वारा रसोइयों की नियुक्ति पहले से ही की गई है। इसके बावजूद छोटी-छोटी बालिकाओं से रसोई का कार्य कराया जाना बेहद गंभीर लापरवाही और नियमों की अनदेखी को दर्शाता है। स्कूल जैसे पवित्र स्थान पर इस तरह का कृत्य शिक्षा की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग हरकत में आया। बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) रोशनी सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लिया है। बीएसए ने साफ शब्दों में कहा है कि जिले के किसी भी परिषदीय विद्यालय में इस प्रकार की लापरवाही या नियम विरुद्ध कार्य पाए जाने पर संबंधित हेड मास्टर और जिम्मेदार शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ दंडात्मक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा कि मिड डे मील से जुड़े सभी कार्य केवल नियुक्त रसोइयों द्वारा ही कराए जाएं।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छात्र-छात्राओं को शिक्षा ग्रहण करने के लिए विद्यालय भेजा जाता है, न कि उनसे घरेलू या श्रम से जुड़े कार्य करवाने के लिए। विद्यालयों में बच्चों को सुरक्षित, सम्मानजनक और प्रेरणादायक वातावरण मिलना चाहिए, जहां वे बिना किसी दबाव के अपने भविष्य का निर्माण कर सकें। बीएसए रोशनी सिंह ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के विद्यालयों का नियमित निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि कहीं भी छात्र-छात्राओं से मिड डे मील या अन्य निजी कार्य न कराया जा रहा हो। यदि ऐसा कहीं भी पाया जाता है, तो संबंधित के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या जिम्मेदार लोग अपने कर्तव्यों का सही तरीके से निर्वहन कर रहे हैं या नहीं। जहां एक ओर सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बच्चों को बेहतर भविष्य देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की घटनाएं उन प्रयासों पर पानी फेरने का काम कर रही हैं। स्थानीय अभिभावकों और जागरूक नागरिकों में भी इस घटना को लेकर नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। बच्चों से इस प्रकार का कार्य करवाना पूरी तरह अनुचित है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो निश्चित रूप से संबंधित शिक्षकों और जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। यह घटना शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही तय करने के लिए एक चेतावनी भी है।

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