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रूद्रपुर: दलित पत्रकार ने पुलिस पर लगाया थर्ड डिग्री और जातीय अपमान का आरोप! फर्जी मुकदमा, हिरासत में मारपीट और अमानवीय व्यवहार


रूद्रपुर। ग्राम केशोवाला निवासी पत्रकार विमल भारती उर्फ गोल्डी निर्भीक ने बाजपुर पुलिस पर बर्बर अत्याचार, जातीय उत्पीड़न और कानून के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से शासन-प्रशासन में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करते रहे हैं, जिसके चलते उन्हें निशाना बनाया गया।

पत्रकार वार्ता में विमल भारती ने बताया कि वह पिछले 13-14 वर्षों में कई न्यूज चैनलों में कार्य कर चुके हैं तथा वर्तमान में केन्यूज चैनल और अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘खबरदार उत्तराखंड टीवी’ से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि 11 नवंबर 2025 को उन्होंने बाजपुर पुलिस विभाग में एक ही स्थान पर कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की बार-बार हो रही तैनाती को लेकर अपने डिजिटल मंच पर समाचार प्रसारित किया था।

उनका कहना है कि 12 नवंबर 2025 को उन्होंने राष्ट्रपति, गृह मंत्रालय भारत सरकार, मुख्यमंत्री उत्तराखंड, राज्यपाल उत्तराखंड और उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक को लिखित रूप से सूचित किया था कि पुलिस विभाग में पनप रहे भ्रष्टाचार के विरुद्ध अभियान चलाने के कारण उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाया जा सकता है या नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

पत्रकार ने आरोप लगाया कि 13 नवंबर 2025 को भारी पुलिस बल और लोक निर्माण विभाग की सहायक अभियंता नेहा शर्मा जेसीबी मशीन के साथ बिना पूर्व सूचना उनके घर पहुंचीं और अतिक्रमण के नाम पर केवल उनके मकान पर कार्रवाई की गई। उनका कहना है कि वह स्वयं समय लेकर निर्माण हटाने को तैयार थे, इसके बावजूद तोड़फोड़ की गई।

विमल भारती के अनुसार, वह अपने मोबाइल फोन से कार्रवाई का वीडियो बना रहे थे, तभी उपनिरीक्षक जसविंदर सिंह ने उनका मोबाइल छीन लिया और उन्हें जबरन पुलिस वाहन में बैठाकर कोतवाली ले जाया गया। उनका आरोप है कि उनके विरुद्ध लोक निर्माण विभाग की सहायक अभियंता नेहा शर्मा की ओर से प्रार्थना पत्र लेकर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 132, 221 और 351(2) के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया।

उन्होंने बताया कि बिना विधिक नोटिस दिए उन्हें उपनिरीक्षक जसविंदर सिंह, उपनिरीक्षक प्रहलाद बिष्ट, कांस्टेबल प्रभात चैधरी और कांस्टेबल बलवंत बिष्ट द्वारा पुलिस वाहन से बन्नाखेड़ा चैकी ले जाया गया और हवालात में बंद किया गया।

पत्रकार का आरोप है कि बाद में उनसे उनके मोबाइल और जीमेल आईडी का पासवर्ड मांगा गया। इंकार करने पर चैकी परिसर में स्थित एक कक्ष में दीपक कौशिक, अशोक कांडपाल, जगदीश तिवारी, उपनिरीक्षक प्रहलाद बिष्ट, सिपाही गिरीश पाटनी, सिपाही विजय बिष्ट, सिपाही प्रभात चैधरी और अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा उनके साथ मारपीट की गई तथा जाति-सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अपमानित किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनका मोबाइल जबरन खुलवाकर डेटा कॉपी किया गया और उनके चैनल से संबंधित पेशेवर पहचानें हटाई गईं।

विमल भारती ने बताया कि 15 दिसंबर 2025 को उन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड, गृह सचिव उत्तराखंड, पुलिस प्राधिकरण हल्द्वानी और कुमाऊं मंडल के पुलिस महानिरीक्षक को शिकायत भेजी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 25 दिसंबर 2025 को उन्होंने नैनीताल उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की, जहां से जांच के आदेश जारी हुए। उनका कहना है कि निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

उन्होंने यह भी बताया कि 8 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने प्रकरण का संज्ञान लेकर जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उधम सिंह नगर को नोटिस जारी किया तथा 24 जनवरी 2026 को दूसरा नोटिस भी भेजा गया, किंतु अब तक कार्रवाई नहीं हुई।

प्रेस कांफ्रेंस में विमल भारती ने कहा कि यह पूरा प्रकरण एक पत्रकार को डराने और उसकी आवाज दबाने का प्रयास है। उन्होंने मीडिया, सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार संस्थाओं से मामले में हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की।

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