जायस/अमेठी। जायस सरकार की महत्वाकांक्षी योजना गरीबों को छत देने के नाम पर चलाई जा रही सरकारी आवास योजना जिले में सवालों के घेरे में है। जमीनी हकीकत यह बता रही है कि योजना का लाभ जरूरतमंदों तक नहीं, बल्कि रसूखदारों और संपन्न लोगों तक पहुंचाया जा चुका है। मामला बहुचर्चित जायस नगर पालिका परिषद के वार्ड नंबर-12 मौल्वी-कला का है। जहां सगीर अहमद व उसके सगे भाइयों को आवास स्वीकृत होने की चर्चा ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिया हैं।
जांचकर्ता व डूडा कर्मचारियों ने मोटी रकम लेकर अमीरों को बनाया पात्र,मुहैया कराया पीएम आवास-सूत्र
आरोप है कि जिन लोगों के पास पहले से पक्का बहुमंजिला मकान,गाड़ी और कई बीघा जमीन मौजूद है, उन्हें पात्र बनाकर सरकारी धन की बंदरबांट किया जा रहा है। सरकार मंचों से पारदर्शिता और गरीब कल्याण के बड़े-बड़े दावे करती है। लेकिन अमेठी की तस्वीर इन दावों की पोल खोल रही है। जब आपत्रो को आवास मुहैया कराया जा रहा है। तो जिम्मेदार अधिकारी आखिर खामोश क्यों हैं! इससे पहले भी कई समाचार पत्रों में आवास घोटालों की खबरें प्रकाशित होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई जांच के नाम पर जिम्मेदार अधिकारी कतरा क्यो रहे है। क्या जिले के जिम्मेदार डूडा कर्मचारी दूसरी किस्त खाते में डलने का प्रोग्राम बना रहे हैं। अपात्रों को पात्र बनाने वाले ऐसे कर्मचारी व अधिकारियों पर कब गिरेगी गाज क्या जांच सिर्फ कागजों में सिमटकर रह जाएगी,या फिर वाकई निष्पक्ष कार्रवाई होगी यदि शीघ्र और पारदर्शी जांच नहीं हुई तो जनता यह मानने को मजबूर होगी कि इस लूट को कहीं न कहीं उच्चाधिकारियो का संरक्षण प्राप्त है। अब देखना यह है कि प्रशासन कुम्भकर्णी नींद से जागता है। या फिर गरीबों के हक पर ऐसे ही डाका पड़ता रहेगा ।
.jpg)