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गाजियाबाद के युवक को 'इच्छा मृत्यु' देने की मांग! सुप्रीम कोर्ट ने कहा - अंतिम फैसले से पहले करेंगे माता-पिता से बात


सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह गंभीर रूप से बीमार गाजियाबाद के हरीश को 'इच्छा मृत्यु' देने से पहले उसके माता-पिता से बात करेगा. कोर्ट ने इसके लिए 13 जनवरी की तारीख तय की है. जस्टिस जे बी पारडीवाला की अध्यक्षता वाली बेंच ने हरीश की स्थिति को लेकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की रिपोर्ट को देखने के बाद यह आदेश दिया है.

11 दिसंबर को कोर्ट ने AIIMS को 32 वर्षीय हरीश राणा की स्वास्थ्य जांच कर रिपोर्ट देने को कहा था. रिपोर्ट देखने के बाद जजों ने अफसोस जताया. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जरूरी कदम उठाने होंगे, लेकिन उससे पहले युवक के माता-पिता से आमने-सामने बात करना जरूरी है. जजों ने आदेश दिया कि मेडिकल रिपोर्ट की कॉपी युवक के परिवार को दी जाए.

चंडीगढ़ में रह कर पढ़ाई कर रहे हरीश 2013 में अपने पेइंग गेस्ट हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे. इससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं. उसके बाद से वह लगातार बिस्तर पर हैं. उनकी स्थिति 100 प्रतिशत दिव्यांगता की है. उनका जीवन वेंटिलेटर पर होने के चलते ही अब तक चल रहा है. बेटे के ठीक होने की उम्मीद छोड़ चुके माता-पिता अब चाहते हैं कि उसे पैसिव युथनेसिया दे दिया जाए.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के जिला हस्पताल से 31 वर्षीय हरीश पर रिपोर्ट मांगी थी. जिला हस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया था कि उनकी हालत बहुत बुरी है. उनके स्वस्थ होने की संभावना न के बराबर है. लगातार बिस्तर पर रहने के चलते उनके शरीर पर बेड शोर (घाव) हो गए हैं. वह अपार कष्ट में है.

पैसिव युथनेसिया (इच्छा मृत्यु) की प्रक्रिया में मरीज को जीवित रखने वाले उपचार को रोक कर उसे मरने दिया जाता है. 2018 में दिए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर निर्देश तय किए थे. इनके तहत 2 मेडिकल रिपोर्ट लेना जरूरी है. हरीश के मामले में दोनों रिपोर्ट में कहा गया है कि उनका स्वस्थ हो पाना लगभग असंभव है. वेंटिलेटर की सहायता से जीवित रखा जाना उनके लिए कष्टदायक है.

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