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मिर्जापुर: दो दिनों से लगातार गांव में पसरा मातम! राजगढ़ के खंमरिया गांव के बिंद कस्बे में चुनार रेलवे हादसे से आहत लोगों के घरों में दुसरे दिन नहीं जले चूल्हे


राजगढ़/मिर्जापुर। स्थानीय क्षेत्र के खंमरिया गांव से कार्तिक पूर्णिमा स्नान पर गोमो पंसैजर से गंगा स्नान करने गए ,एक ही परिवार के चार श्रद्धालुओ के साथ अन्य जगहों के दो लोगो का बुधवार के सुबह चुनार रेलवे स्टेशन पर स्टेशन से बाहर निकले के कोशिश में विपरीत दिशा में जाने के वजह ट्रेन के चपेट में आकर दर्दनाक मौत हो गई। उस समय का खौफनाक मंजर देख कर लोगों में अफरातफरी मच गई थी।लोग जान बचाने के जद्दोजहद में इधर-उधर भागते नजर आए।

जिसमें राजगढ़ क्षेत्र के खंमरिया गांव के बिंद कस्बे की एक ही परिवार के दो सगी बहनें व चाची,बुआ एक साथ ट्रेन से कटकर उनकी मौत हो गई। इस दुखद घटना की सूचना मिलते ही स्वजनों के साथ पुरे गांव में मानों पहाड़ टूट गया है। हृदय विदारक हादसे से लगातार दो दिनों से पुरे गांव में मातम पसरा है। ज्यादातर लोगों के घरों में हादसे के दुसरे दिन भी चूहे नहीं जले, स्वजनों के साथ गांव के लोग भी रोते बिलखते दिखाई दे रहे हैं। वहीं प्रशासन की तरफ से कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचे, मुआवजे की बात अलग रही है। कोई अधिकारी पीड़ीत परिवार से सहानुभूति व्यक्त करने नहीं पहुंचा। 

वहीं पीड़ित परिवार मृतका शिवकुमारी,साधना के पिता विजय शंकर का कहना है कि। उनके दोनों लाडलियों की मौत रेलवे विभाग के लापरवाहियों से हुई है,कार्तिक पूर्णिमा स्नान पर रेलवे स्टेशन पर उमड़ी भीड़ का दिशा निर्देश देने की जिम्मेदारी जीआरपी की थी। जीआरपी अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाई। निभाईं होती तो ये हादसा टल जाता।

वहीं मृतका सविता के पति व मृतका अंजू के भाई राजकुमार का कहना है कि मेरा पूरा घर उजड़ गया।मेरे 5 वर्ष व 4 वर्ष की दो बेटियां व 10 वर्षीय एक बेटा अनाथ हो गए। बहन की भी शादी तय थी। रेलवे विभाग की लापरवाही ने उसे स्वर्गवासी बना दिया। बहन की शादी रचाने का सपना अधूरा रह गया।

बोले खौफनाक मंजर के चश्मदीद -गांव निवासी सुनीता ने बताया कि गंगा स्नान के लिए रेलवे स्टेशन पर गई थी हादसा भयावह था। मृतकों के एक पैर रेलवे ट्रैक पर थे,दूसरा पैर प्लेटफार्म पर रखकर चढ़ना चाहते थे उसी दौरान ट्रेन आ गई। सभी को रौंदते हुए निकल गई। हाहाकार मच गया। वो दर्दनाक मंजर देखकर मेरे होश उड़ गए। साथ में गई गांव निवासी आरती ने बताया कि गांव की चारों मृतका प्लेटफार्म पर दोनों पैर रखकर खड़ा हो रही थी। उसी दौरान तेज रफ्तार से आ रही ट्रेन अपने चपेट में लेकर रौंद दिया। उनका पहचान करना मुश्किल था। किसी हमने पहचान करके जीआरपी को बताया। साथ में गई सहेली नेहा ने रोते हुए बताया कि मेरे सामने मेरी सहेलियां शिव कुमारी, साधना, अंजू ट्रेन से कटकर क्षत क्षितिज हो गई मैं देखती रह गई,कुछ नहीं कर सकीं। 10 वर्षीय भाई विनय ने बताया कि प्लेटफार्म पर खड़ा होकर मां सविता, दोनों वहन , शिवकुमारी, साधना व बुआ अंजू को ट्रेन कटते हुए देखकर वहीं गिर गया। गांव की महिलाएं भीड़ से बाहर निकाला। बोले गांव वाले 

गांव निवासी नागेश्वर, ओमप्रकाश, हीरा लाल लालता, सत्यनारायण अन्य बताया कि इस बेहद दुखद हादसे से पुरा गांव शोक में डूब गया है। लोगों के घर में हादसे के बाद से चूल्हे नहीं जले रहे हैं। दोनों संगी मृतका बहनों के पिता बोले विजय शंकर बोले 

बेटियां व बहन भाई की पत्नियां विगत 8 वर्षों से ट्रेन से गंगा स्नान करने के लिए चुनार रेलवे स्टेशन पर उतरकर जाती थी कभी ऐसा हादसा नहीं हुआ।

हमारी बेटियां पढ़ाई में हमेशा फर्स्ट आती थी। अधिकारी बनाने का सपना टूटकर बिखर गया। वहीं मृतकाओ के माताओं का रो रोकर बुरा हाल है।

पीड़ित परिवार को शोक संवेदना करने के लिए क्षेत्र कोई जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचे।  अपना दल एस के कार्यकर्ता देवी पाल,सालिक पटेल हनिफ खान रमेश कुमार पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त किया।

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