फतेहपुर/ बाराबंकी। पंचायत चुनाव नजदीक आते ही प्रधान के खिलाफ उपविजेता और भावी उम्मीदवार अधूरी पानी की टंकी को मुद्दा बनाकर चुनाव में मैदान में है। आने वाले पंचायत चुनाव में अधूरी पानी की टंकी प्रत्याशियों के जीत हार का सबक बन सकती है।हर घर नल से जल योजना के तहत गांवों में पेयजल पहुंचाने के लिए शुरू की गई परियोजनाएं अब पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों के लिए किसी चुनावी मुद्दे से काम नहीं है। उम्मीदवार इसे अपना चुनावी हथियार समझ कर प्रधान को घेरने की कोशिश में लगे हैं। अधूरी पड़ी पेयजल योजनाओं को लेकर मतदाताओं में पहले से ही नाराजगी है । मतदाताओं की दुखती नस पड़कर भावी उम्मीदवार इस मुद्दे को अपना हथियार बनाकर वर्तमान प्रधान पर निशाना साध रहे हैं। क्षेत्र के गड़िया पंचायत की आबादी करीब चार हजार है। अहमद नगर, भोगिन, बंजरगढ़, बबुरिहा समेत अन्य मजरों में पानी की आपूर्ति टंकी के जरिये होनी थी, लेकिन दो साल गुजर जाने के बाद भी पानी टंकी निर्माणाधीन है। मजबूरन ग्रामीण हैंडपंपों और निजी संसाधनों से प्यास बुझाने को मजबूर हैं।गांव के निवासी महंत मोनू पांडेय व ललित राजवंशी बताते हैं कि समय से टंकी बनकर चालू हो जाती तो गांव के लोगों को शुद्ध पेयजल मिल जाता, लेकिन अब तक काम पूरा न होना बड़ी लापरवाही है। गांव में डाली गई पाइप लाइनें कई जगह टूट चुकी हैं। जिन सड़कों को पाइप लाइन डालने के लिए खोदा गया था, उनकी मरम्मत भी ठीक से नहीं हुई, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।गांव के मनोज शुक्ला, आर्यन बाजपेयी, शिव प्रताप सिंह, रविकांत, नीलू, आशु और वरुण सहित कई ग्रामीण कहते हैं कि अगर पानी टंकी चालू हो जाए और नियमित जलापूर्ति शुरू हो जाए तो गांव को जल संकट से बड़ी राहत मिल जाएगी।
इस संबंध में जल निगम (मिशन शक्ति) के जेई ऋषभ विश्वकर्मा का कहना है कि फंड की कमी के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ है। जैसे ही धनराशि जारी होगी, पानी टंकी का निर्माण व संबंधित कार्य दोबारा शुरू करा दिए जाएंगे।ग्रामीणों का कहना है कि पिछले दो वर्षों से अधूरी पड़ी पानी टंकी अब सिर्फ कंकरीट का ढांचा ही नहीं, बल्कि उनकी नाराजगी का प्रतीक बन चुकी है। लोग साफ कह रहे हैं कि जो भी उम्मीदवार इस टंकी को पूरा कराने की ठोस गारंटी देगा, वोट उसी को मिलेगा। ऐसे में अधूरी पेयजल परियोजना इस बार कई प्रत्याशियों की जीत-हार का फैसला भी कर सकती है।
