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लखनऊः घर-घर जाकर स्वास्थ्य कर्मी लोगों को खिलाएंगे फाइलेरिया की दवा! फाइलेरिया रोकने को अभियान चलाने से पहले तैयारी पूरी, समीक्षा बैठक हुई


लखीमपुर-खीरी। जिले में  फाइलेरिया बीमारी को रोकने का अभियान चलने जा रहा है।इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग की टीम घर घर जाकर दवा खिलाएगी।अभियान में लगी एक टीम पर 25 लाख लोगो को दवा खिलाने का लक्ष्य रहेगा। अभियान 10 अगस्त से 28 अगस्त तक संचालित किया जायेगा। इसमेंसोमवार,मंगलवार,गुरूवार ,शुक्रवार को एक वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों तथा महिला एवं पुरूषों को आशा एवं फ्रन्टलाइन वर्कर्स  घर-घर जाकर फाइलेरिया रोग की दवा खिलाएगी।सीएमओ डा. संतोष गुप्ता ने फाइलेरिया रोग के फैलने, फाइलेरिया होने के कारण सहित फाइलेरिया से बचाव में दवा को खिलाने के बारे में बताया।  सीएमओ डा. संतोष गुप्ता ने बताया कि 10 अगस्त से 28 अगस्त तक फाइलेरिया रोकने को अभियान चलेगा। फाइलेरिया रोग क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होने वाला एक तरह का संक्रामक रोग है। इसे हाथी पांव,एलीफैन्टेसियासिस के नाम से भी जाना जाता है। इसके लक्षण पैरो में सूजन, हाथ में सूजन, पुरूषों में हाइड्रोसील ,महिलाओ के स्तनो में सूजन होती है। जिले में अब तक 3500 रोगी निकले है।  इसकी रोकथाम के लिये अभियान चलाया जा रहा है। जिले के आठ ब्लाकों नकहा, बेहजम, फरधान, फूलबेहड़, रमियाबेहड़, पलिया, कुम्भी (गोला) एवं धौरहरा में घर घर जाकर दवा खिलाई जाएगी। सात ब्लाकों में सीएचसी पर बूथ लगाकर दवा का खिलाई जायेगी। नगरीय क्षेत्र में सात टीमें सार्वजनिक स्थानों पर एवं समस्त राजकीय एवं गैर सरकारी कार्यालयों में बूथ लगाकर दवा का सेवन करायेगी।  जिन व्यक्तियों में फाइलेरिया के परजीवीं होते हैं।उन व्यक्तियों में दवा के सेवन के बाद चक्कर आना, जी मिचलाना, उल्टी आना या हल्का बुखार आदि लक्षण आ सकते हैं, जो कि एक से दो घण्टें में सामायन्ता समाप्त हो जाते हैं गम्भीर समस्या के समाधान को जिला स्तर पर रैपिड रिस्पान्स टीम का गठन किया गया है।फाइलेरिया की दवा में आइवरमेक्टीन एवं अलबेन्डाजोल टैबलेट शामिल हैं।  साल में एक बार घर-घर तक मुफ्त दी जाती है। डीईसी की गोली खाली पेट नहीं खानी है। अल्बेन्डाजोल की गोली चबाकर खानी होती है। दवा देने वाले स्वास्थ्यकर्मी के सामने सभी दवाओं को खाना जरूरी है।सीएमओ डा संतोष गुप्ता ने बताया कि दवाओं के साथ यह भी जरूरी है कि मच्छरों के काटने से खुद को बचायें।  फाइलेरिया रोग से ग्रसित मरीज को कोई मच्छर काट ले और वह मच्छर किसी सामान्य व्यक्ति को काट ले तो यह परजीवी उस शरीर में पहुंच कर उसे संक्रमित कर सकता है। ऐसे में मच्छरदानी का प्रयोग करें और घर ,घर के आस पास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

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