पीलीभीत। प्रदेशभर के पंचायत सहायकों ने सरकार को खुला चैलेंज देते हुए डिजिटल क्रॉप सर्वे का काम ठुकरा दिया है। सोमवार को जिले के पंचायत सहायक कलेक्ट्रेट पहुँचे और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए साफ कहा दृ “अब यह बोझ हम नहीं उठाएँगे।”पंचायत सहायक यूनियन उत्तर प्रदेश ने शासन को भेजे पत्र में लिखा कि लेखपालों की जगह पंचायत सहायकों से फसल सर्वे कराना व्यावहारिक रूप से असंभव है। 30 जुलाई 2025 को जारी शासनादेश के बाद लगातार दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन अब पंचायत सहायकों ने दो टूक इनकार कर दिया।पंचायत सहायकों का दर्द और तर्क न स्मार्टफोन, न जीपीएस सुविधा।
सचिवालय, जनसेवा केंद्र व जनगणना का भार पहले से ही अधिक।कृषि सर्वे पंचायत सहायकों पर लादना नाइंसाफी।अतिदूर यात्रा की चुनौती खेत-खेत जाकर सर्वे करना अव्यावहारिक।
मानदेय का सवाल बिना प्रोत्साहन राशि, अतिरिक्त कार्य नामंजूर।पंचायत सहायकों की प्रमुख माँगें है की उच्च गुणवत्ता वाले स्मार्टफोन तत्काल उपलब्ध कराए जाएँ।फसल सर्वे पर अलग से विशेष मानदेयध्प्रोत्साहन राशि दी जाए।जिस विभाग का काम है, वही विभाग संपन्न करे। जोखिमपूर्ण कार्य पर बीमा व सुरक्षा कवच मिले।यूनियन ने सरकार पर आरोप लगाया कि “पंचायत सहायकों को मुफ्त का मजदूर समझा जा रहा है। बिना साधन, बिना प्रशिक्षण और बिना सम्मान, हर विभाग का बोझ हमारी पीठ पर लादा जा रहा है।”
साथ ही चेतावनी दी गई दृ “माँगें पूरी न हुईं तो कार्य का बहिष्कार होगा और आंदोलन छेड़ा जाएगा।”ज्ञापन सौंपने के दौरान संजीव, संघप्रिया, प्रदीप, संगम, विजय, धर्मेंद्र, मोहित राठौर, शहरोज, दिग्विजय, शिवानी, आदर्श, विजयपाल, रामकिशोर, जगदीश, दीपक सहित जिलेभर के पंचायत सहायक बड़ी संख्या में मौजूद रहे।संजीव ने कहा दृ “हम ग्राम पंचायत सचिवालय की रीढ़ हैं, लेकिन हमें मजदूर समझकर हर काम का बोझ थोप दिया जाता है। बिना साधन और मानदेय के। डिजिटल क्रॉप सर्वे सर्वे नामुमकिन है। अगर सरकार ने मजबूर किया, तो हम आंदोलन की राह अपनाएँगे।
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