पीलीभीत। पूर्व केंद्रीय मंत्री और पर्यावरण संरक्षण की प्रखर आवाज मेनका संजय गांधी ने अपने 69वें जन्मदिन पर एक बार फिर यह साबित किया कि उनके रिश्ते राजनीति की सीमाओं से परे, सीधे दिलों से जुड़े हैं।दिल्ली स्थित आवास पर जब पीलीभीत से पहुँचे समर्थकों ने पौधा भेंटकर शुभकामनाएँ दीं, तो वह पल केवल औपचारिकता नहीं बल्कि आत्मीयता और अपनत्व का प्रतीक बन गया।भावुक शब्दों में मेनका गांधी ने कहा “पीलीभीत मेरा अपना घर है और वहाँ के लोग मेरा परिवार हैं। मैं अपने परिवार और उसकी जंगल-पर्यावरण से सजी धरती के लिए हमेशा तैयार हूँ।”उनका यह कथन किसी राजनीतिक आश्वासन से अधिक उस रिश्ते की गवाही है, जो दशकों से मेनका गांधी और पीलीभीत को जोड़ता आया है। राजनीतिक उठापटक और बदलते समीकरणों के बावजूद पीलीभीत के प्रति उनका स्नेह कभी नहीं डगमगाया।जन्मदिन के अवसर पर उन्होंने समर्थकों से कहा कि पर्यावरण संरक्षण ही जीवन का असली संकल्प होना चाहिए। यह संदेश किसी औपचारिक नसीहत से अधिक उनकी जीवनशैली और सोच का आईना था। इस मौके पर उनके निजी सचिव दीपक पांडे, प्रतिनिधि बलजिंदर सिंह लाहौरिया सहित कई समर्थक मौजूद रहे। सभी ने उन्हें पीलीभीत आने का आमंत्रण दिया, जिस पर मेनका गांधी ने अपने “परिवार” को स्वस्थ और खुशहाल रहने की शुभकामनाएँ दीं।
कभी मेनका-वरुण गांधी का गढ़ रही पीलीभीत लोकसभा सीट से 2024 में भाजपा प्रत्याशी जितिन प्रसाद सांसद बने। वर्तमान में वे केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं। उन्होंने भाजपा की वरिष्ठ नेता मेनका गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएँ देते हुए उनके दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
लेकिन, जितिन प्रसाद की यह ‘औपचारिक बधाई’ अब सियासी अटकलों का कारण बन गई है।सियासी गलियारों में चर्चा है कि सुल्तानपुर से हारने और टिकट कटने के बाद पार्टी के भीतर मेनका-वरुण गांधी की स्थिति पर मंथन शुरू हो गया है। भाजपा 2029 की रणनीति में किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। ऐसे में केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद का संदेश एक संकेत माना जा रहा है कि पार्टी हाईकमान जल्द ही गांधी परिवार के इन चेहरों पर बड़ा फैसला ले सकता है।
