बरगदी गांव निवासी संतोष उनका परिवार और सीता अपने कमरे में सो रही थीं। आग के धुएं से संतोष को घुटन महसूस हुई, तो आंख खुल गई। उसने सीता के कमरे से आग की लपटें उठते देखा। संतोष ने शोर मचा कर छात्रा को जगाया। मगर तब तक वह लपटों में आ चुकी थीं।
किसी तरह से वह कमरे से बाहर निकलीं, लेकिन तब तक वह लपटों की चपेट में आ चुकी थी। सभी लोग भाग कर घर से बाहर आ गए। देखते ही देखते पूरा मकान आग की चपेट में आ गया।
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