एनयूजे की संगोष्ठी में भाषा की शुद्धता, खोजपरक पत्रकारिता और मीडिया की विश्वसनीयता पर हुई चर्चा
लखनऊ। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक विशाल सिंह ने कहा कि पत्रकारिता में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए, लेकिन अपुष्ट समाचार से पत्रकारिता की विश्वनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। सोशल मीडिया और एआई के दौर में खबरों की सत्यता जांचना पत्रकारों की बड़ी जिम्मेदारी है। वह शनिवार को नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया), उत्तर प्रदेश की ओर से सूचना विभाग के सहयोग से आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
‘पत्रकारों में पत्रकारीय समझ’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में विशाल सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए भ्रामक सूचनाएं फैलने और एआई के दुरुपयोग पर चिंता जताई। उन्होंने यूरोपीय देशों में विरोध प्रदर्शनों और लूटपाट की घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री लोगों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में पत्रकारों को किसी भी सूचना को आगे बढ़ाने से पहले उसकी सत्यता की जांच करनी चाहिए।
टीवी नेटवर्क 10 के संपादक संजय गिरि ने मीडिया पर कॉरपोरेट प्रभाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उद्योगपतियों के बढ़ते प्रभाव से पत्रकारिता की निष्पक्षता और स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है। पत्रकारिता की मौजूदा स्थिति पर आत्ममंथन करने और संपादकीय स्वतंत्रता बनाए रखने की जरूरत है। उन्होंने पत्रकार संगठनों से मीडिया की विश्वसनीयता और गरिमा बचाने के लिए आगे आने की अपील की।
विशिष्ट अतिथि आईटी विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने कहा कि एआई और डिजिटल तकनीक पत्रकारिता के कामकाज को तेजी से बदल रहे हैं। पत्रकारों को तकनीक से अपनी दक्षता जोड़नी होगी। उन्होंने डेटा विश्लेषण, मेटाडेटा की पड़ताल और फेक न्यूज की पहचान पर जोर देते हुए कहा कि खबर देने की गति से अधिक महत्वपूर्ण उसकी सत्यता है। पत्रकारों को डिटेक्टिव की तरह सूचनाओं के स्रोत और तथ्यों की जांच करनी चाहिए। उन्होंने तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने में टाटा समूह की ओर से सहयोग का आश्वासन भी दिया।
विशिष्ट अतिथि अम्बरीष श्रीवास्तव ने एआई को इंजन की संज्ञा देते हुए कहा कि इसका इस्तेमाल लाभकारी भी हो सकता है और नुकसानदेह भी। डिजिटल दौर में कंटेंट तैयार करने के साथ उसकी सत्यता परखना भी जरूरी है। पत्रकारों को एआई का उपयोग अपने ज्ञान और विवेक के साथ करना चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार प्रभात रंजन दीन ने हिंदी पत्रकारिता में भाषा और वर्तनी की गलतियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को शब्दों के सही अर्थ और प्रयोग के प्रति सजग रहना चाहिए। ‘पूंछ’ और ‘पूछ’ जैसे शब्दों के अंतर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लेखन में छोटी-सी गलती भी अर्थ बदल सकती है। उन्होंने ‘विनम्र श्रद्धांजलि’ जैसे प्रयोग का उदाहरण देकर अनावश्यक शब्दों के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी। दीन ने कहा कि पत्रकारिता में खबरों की तह तक पहुंचने और तथ्यों को सामने लाने की परंपरा कमजोर पड़ रही है। स्कूप और खोजपरक पत्रकारिता को फिर मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एनयूजे उत्तर प्रदेश की ओर से आयोजित यह संगोष्ठी पत्रकारों में पत्रकारीय समझ विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। संगोष्ठी में एनयूजे उत्तर प्रदेश के संयोजक प्रमोद गोस्वामी, संरक्षक वीरेंद्र सक्सेना, प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र दुबे, महामंत्री बिजेंद्र शर्मा और कोषाध्यक्ष अरुण अवस्थी सहित संगठन के पदाधिकारी और पत्रकार मौजूद रहे।
