भांवरकोल/गाजीपुर। भोजपुरी भाषा और संस्कृति अपनी मिठास, लोकपरंपरा, संस्कार और समृद्ध विरासत के लिए देश-दुनिया में अलग पहचान रखती है। बदलते दौर में भोजपुरी गीत-संगीत में बढ़ती अश्लीलता और अमर्यादित भाषा के बीच बक्सर जिले के समाजसेवी एवं भोजपुरी भाषा परिषद के संरक्षक नंदकुमार तिवारी ने भोजपुरी की गरिमा और सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए लंबे समय से अभियान चला रखा है।
नंदकुमार तिवारी पिछले एक दशक से अधिक समय से भोजपुरी में अश्लीलता के खिलाफ सामाजिक जागरूकता के साथ कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर भी आवाज उठाते रहे हैं। सार्वजनिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अश्लील और अमर्यादित प्रस्तुतियों के खिलाफ उन्होंने कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया है। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अनुमति के लिए स्पष्ट नियम और शपथ पत्र अनिवार्य किए जाने की मांग भी उठाई है।
उनका कहना है कि भोजपुरी केवल मनोरंजन की भाषा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की संस्कृति, संस्कार और पहचान से जुड़ी भाषा है। भिखारी ठाकुर और महेंद्र मिश्र जैसे लोक रचनाकारों की गौरवशाली परंपरा वाली भोजपुरी को अश्लीलता के कारण बदनाम नहीं होने देना चाहिए।
वे समाज से भी अपील करते हैं कि अश्लील गीतों और ऐसे कार्यक्रमों का बहिष्कार कर साफ-सुथरी भोजपुरी को प्रोत्साहित किया जाए। बक्सर की धरती वैसे भी ऋषि-मुनियों और विद्वानों की भूमि रही है। नंदकुमार तिवारी ने भोजपुरी की गरिमा और सांस्कृतिक विरासत को बचाने का अभियान चलाकर इस परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है, जिससे पूरे बिहार और भोजपुरी समाज का मान बढ़ता है।
