- घरों की मोटरें बंद तो कारोबार भी ठप
- बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भड़का लोगों का गुस्सा
पीलीभीत रू-तेज आंधी, तूफान और मूसलाधार बारिश ने मझोला कस्बे की विद्युत व्यवस्था को पूरी तरह पटरी से उतार दिया। आंधी के दौरान कई स्थानों पर भारी-भरकम पेड़ बिजली की मुख्य लाइनों पर जा गिरे। इससे हाईटेंशन लाइन क्षतिग्रस्त हो गई और पूरे कस्बे की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। करीब 20 घंटे तक बिजली गुल रहने से नगर में ब्लैकआउट जैसे हालात बने रहे। आखिरकार बिजली विभाग की टीम ने लगातार प्रयास के बाद आपूर्ति बहाल की, तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली।बिजली गुल होने से घरों में लगे इनवर्टर जवाब दे गए और मोबाइल फोन तक चार्ज नहीं हो सके। सबसे बड़ी समस्या पेयजल की रही। बिजली न होने के कारण पानी की मोटरें नहीं चल सकीं और सुबह से ही कई घरों में पानी का संकट खड़ा हो गया। बिजली की लंबी कटौती को लेकर नगरवासियों में विभाग के खिलाफ खासा आक्रोश दिखाई दिया।
विद्युत आपूर्ति बाधित होने का सीधा असर घरेलू कामकाज पर पड़ा। पानी न आने से गृहणियों को खाना पकाने, साफ-सफाई और अन्य जरूरी कामों में भारी परेशानी उठानी पड़ी। बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी तक प्रभावित हुई। महिलाओं का कहना था कि बिजली और पानी दोनों न होने से घर संभालना बेहद मुश्किल हो गया।लंबे पावर कट ने व्यापारियों की मुश्किलें भी बढ़ा दीं। बिजली से चलने वाले कारोबार, फोटोकॉपी सेंटर, कंप्यूटर सेंटर और अन्य प्रतिष्ठानों पर कामकाज प्रभावित रहा। डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं पर निर्भर दुकानदारों को भी मोबाइल चार्जिंग और नेटवर्क की समस्या से परेशानी उठानी पड़ी। व्यापारियों ने कहा कि त्योहार और सीजन के समय इतने लंबे बिजली संकट से कारोबार को नुकसान उठाना पड़ा।नगरवासियों का आरोप है कि बिजली आपूर्ति ठप होने के बाद विभाग को लगातार सूचना दी गई, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी। बिजली कब आएगी, इसे लेकर लोग परेशान रहे। करीब 20 घंटे बाद आपूर्ति बहाल होने पर लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन इस दौरान हुई परेशानी को लेकर बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए।
