अखिल भारतीय गोवंश रक्षण-संवर्धन परिषद की बैठक में शामिल होकर लौटे व्हिप नेता डॉ. राजकमल गुप्ता, गोवंश संरक्षण के लिए सरकार से की ठोस कदम उठाने की मांग
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मुरादाबाद। अखिल भारतीय गोवंश रक्षण-संवर्धन परिषद की ओर से भगवान श्रीकृष्ण की पावन नगरी मथुरा में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में देशभर से आए गौभक्तों, संत-महात्माओं एवं गोवंश संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। बैठक में गोमाता की रक्षा, गोवंश के संवर्धन, गोतस्करी पर प्रभावी रोक लगाने तथा गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने सहित अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में शामिल होकर लौटे व्हिप (विश्व हिंदू परिषद) की केंद्रीय प्रबंधन समिति के सदस्य एवं क्षेत्रीय गोवंश प्रमुख डॉ. राजकमल गुप्ता ने बैठक में हुई चर्चा और पारित प्रस्तावों की जानकारी साझा की।
डॉ. राजकमल गुप्ता ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की पावन भूमि ब्रज में देशभर के गौभक्त एकत्रित हुए। यह वही पवित्र भारतभूमि है, जहां गोमाता को माता और भगवान श्रीकृष्ण को गोपाल के रूप में पूजा जाता है। इसके बावजूद आज गोवंश की दुर्दशा चिंताजनक है। सड़कों पर गोवंश प्लास्टिक खाने को मजबूर हैं। अनेक गायें भूख-प्यास और बीमारियों से पीड़ित हैं, वहीं गोतस्करी के माध्यम से गोवंश को अवैध रूप से कत्लखानों तक पहुंचाए जाने की घटनाएं भी चिंता का विषय हैं।
उन्होंने कहा कि एक ओर हम मंदिरों में नंदी की पूजा करते हैं, वहीं दूसरी ओर अपने सामने गोवंश को तस्करी और हत्या के लिए जाते देखकर मौन रहते हैं। यह स्थिति समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए आत्ममंथन का विषय है। गोमाता की रक्षा केवल किसी एक संगठन या व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का नैतिक और सामाजिक दायित्व है।
गोसम्मान आह्वान अभियान को मिल रहा जनसमर्थन
डॉ. गुप्ता ने बताया कि देशभर में पूज्य संत-महात्माओं के नेतृत्व में 'गोसम्मान आह्वान अभियान' चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर तहसील, जिला एवं राज्य स्तर पर ज्ञापन दिए जा रहे हैं तथा लोगों को गोवंश संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय गोवंश रक्षण-संवर्धन परिषद की यह बैठक केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि गोमाता की रक्षा के लिए ठोस निर्णय लेने और सरकार के समक्ष अपनी अपेक्षाएं रखने का महत्वपूर्ण अवसर रही। बैठक में सरकार, प्रशासन, संत-महात्माओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की भूमिका को लेकर व्यापक चर्चा हुई।
सरकार से की गईं 15 प्रमुख मांगें
बैठक में सरकार से गोमाता को राष्ट्रीय सांस्कृतिक धरोहर घोषित करने तथा गोपाष्टमी को राष्ट्रीय पर्व का दर्जा देने की मांग की गई। इसके साथ ही गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन के लिए स्वतंत्र मंत्रालय और गोचर भूमि के विकास, प्रबंधन तथा अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए गोचर प्राधिकरण की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया।
गोतस्करी, गोहत्या एवं गोवंश पर अत्याचार को गैर-जमानती अपराध बनाते हुए कम से कम 10 वर्ष की सजा और पांच लाख रुपये अर्थदंड का प्रावधान करने की मांग भी उठाई गई। प्रत्येक जिले में गोवंश संबंधी अपराधों की जांच के लिए विशेष पुलिस थाने अथवा प्रत्येक थाने में विशेष पुलिस अधिकारी नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा गया।
गोवंश परिवहन के दौरान टोल प्लाजा और निकासी मार्गों पर आधुनिक तकनीक से निगरानी रखने, तस्करी करने वाले गिरोहों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने तथा प्रत्येक राज्य में वृद्ध, बेसहारा, बीमार और दुर्घटनाग्रस्त गायों के संरक्षण के लिए गो-अभयारण्य स्थापित करने की मांग की गई।
इसके अतिरिक्त गोशालाओं को रोजगारपरक एवं आत्मनिर्भर बनाने, गोवंश की पहचान और निगरानी के लिए साधारण टैग के स्थान पर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक से निर्मित चिप लगाने, विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम में गोवंश के इतिहास और गोविज्ञान को शामिल करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका योजनाओं के अंतर्गत गोशालाओं और बेसहारा गोवंश के संरक्षण से जुड़े कार्यों को शामिल करने, आधुनिक चिकित्सा एवं शल्यक्रिया सुविधाओं से युक्त पशु चिकित्सालय स्थापित करने तथा गोशालाओं में रहने वाली गायों का सरकारी खर्च पर बीमा कराने की मांग की गई।
पशु आहार में मांसयुक्त सामग्री के उत्पादन, भंडारण और बिक्री पर लागू प्रतिबंधों का प्रभावी पालन कराने, विदेशी डेयरी उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने, गोरक्षक कार्यकर्ताओं के विरुद्ध दर्ज कथित झूठे एवं दुर्भावनापूर्ण मुकदमों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने तथा प्रमुख तीर्थस्थलों को पवित्र स्थल घोषित कर स्वतंत्र तीर्थाटन मंत्रालय बनाने का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया।
साथ ही संत-महात्माओं, मठों, मंदिरों एवं धार्मिक संस्थाओं से गोमाता की रक्षा को प्रमुख सामाजिक प्राथमिकता बनाने का आह्वान किया गया।
समाज और नागरिकों से भी किए गए पांच महत्वपूर्ण आह्वान
बैठक में केवल सरकार से मांग करने तक ही सीमित न रहते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग की जिम्मेदारी भी निर्धारित करने पर जोर दिया गया। इसके अंतर्गत 'गोसम्मान आह्वान अभियान' को शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।
नागरिकों से अपील की गई कि वे सड़कों पर घूम रहे गोवंश को प्लास्टिक खाने से बचाएं, उनके लिए भोजन एवं पानी की व्यवस्था करें तथा असहाय गोवंश के पुनर्वास में सहयोग करें।
दैनिक जीवन में पंचगव्य एवं गो-आधारित उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित करने, धार्मिक अनुष्ठानों में शुद्ध गोघृत के प्रयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा गोशालाओं से प्राप्त दूध एवं अन्य उत्पादों को अपनाने पर भी जोर दिया गया।
इसके साथ ही सामाजिक समरसता, परिवारों में गोसेवा के संस्कार, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी उत्पादों के उपयोग और नागरिक कर्तव्यों को गो-केंद्रित सामाजिक परिवर्तन से जोड़ने का आह्वान किया गया।
डॉ. राजकमल गुप्ता ने कहा कि समाज को इस विषय पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए कि जिस नंदी की मंदिरों में पूजा की जाती है, उसी गोवंश को तस्करी और हत्या के लिए ले जाते देखकर कोई भी नागरिक मौन न रहे।
गोमाता को सम्मान दिलाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी : डॉ. राजकमल गुप्ता
डॉ. राजकमल गुप्ता ने कहा कि गोवंश का संरक्षण भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसके लिए सरकार, प्रशासन, धार्मिक संगठनों, किसानों और आम नागरिकों को मिलकर कार्य करना होगा। केवल मांग उठाने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा, बल्कि गोवंश की सुरक्षा, चिकित्सा, भोजन, आवास और पुनर्वास के लिए धरातल पर भी प्रभावी प्रयास करने होंगे।
उन्होंने विश्वास जताया कि मथुरा की इस बैठक में रखे गए प्रस्ताव देशभर में गोसंरक्षण के प्रति नई जागरूकता पैदा करेंगे और गोमाता को उचित सम्मान दिलाने की दिशा में सार्थक पहल साबित होंगे।
