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देशभर में भेजी गई लद्दाख में उगाए गए लिलियम की पहली खेप, LG वीके सक्सेना ने दिखाई हरी झंडी


लद्दाख ने कमर्शियल फूलों की खेती (फ्लोरीकल्चर) के जरिए आजीविका के एक नए और टिकाऊ रास्ते की ओर बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत लद्दाख में उगाए गए शानदार 'लिलियम' फूलों की पहली खेप हवाई जहाज से देश के प्रमुख फूल बाजारों में भेजी गई। उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने आज लेह एयरपोर्ट पर 15,000 "A-ग्रेड" लिलियम स्टैम (फूलों की डंठल) की पहली खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह लद्दाख में नए आर्थिक अवसरों और उद्यमिता को स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। उप-राज्यपाल ने इस पहल के प्रतीक के तौर पर क्रू के हर सदस्य को लद्दाख में उगाए गए लिलियम फूलों का गुलदस्ता भी भेंट किया।

"A-ग्रेड" लिलियम का मतलब ऐसे फूलों से है, जिनकी डंठल पर 4-5 कलियां हों। इनकी कीमत बाज़ार में बहुत अच्छी मिलती है। पहली खेप में लाल, गुलाबी, सफैद, पीले और नारंगी रंग के फूल शामिल हैं। इन सभी को लेह में दुनिया के सबसे ऊंचे फूल के खेत में 10,600 फीट की ऊंचाई पर उगाया गया है। 5-7 दिनों तक ताजा रहने वाले इन फूलों को देश के अलग-अलग बाजारों, मुख्य रूप से दिल्ली, मुंबई और चंडीगढ़ में बेचा जाएगा।

उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस पहल को "ऐतिहासिक" बताया और कहा कि खेती में विविधता लाकर किसानों और युवाओं की आर्थिक स्थिरता के लिए पीएम नरेंद्र मोदी के विजन से प्रेरित होकर, लद्दाख में फूलों की खेती आजीविका के वैकल्पिक और टिकाऊ साधन के तौर पर एक मजबूत आर्थिक जरिया बनकर उभरी है।

शुरुआत के तौर पर, इन फूलों के खेतों में लिलियम की कटाई, छंटाई और पैकेजिंग के काम में 15 स्थानीय महिलाओं को लगाया गया है, जिन्हें प्रति व्यक्ति 900 रुपये की दिहाड़ी दी जा रही है। इन फूलों को राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने और उनकी मार्केटिंग करने की जिम्मेदारी एक स्थानीय युवा और योग्य वनस्पतिशास्त्री (बॉटनिस्ट) को सौंपी गई है। गौरतलब है कि लिलियम प्रीमियम 'कट फ़्लावर' हैं जिनकी फ़्लोरल और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में बहुत मांग है। घरेलू रिटेल बाजार में इनकी कीमत 150 से 200 रुपये प्रति स्टैम तक होती है।

लद्दाख के LG विनय कुमार सक्सेना ने लिलियम की पहली खेप को रवाना करते हुए कहा, "लद्दाख में अपनी तरह का यह पहला ज़्यादा ऊंचाई वाला कमर्शियल फूलों की खेती का प्रोजेक्ट, इस इलाके के लिए खेती और नज़ारे के लिहाज़ से एक बड़ा बदलाव है। यह इलाका सदियों से ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों और बंजर जमीन के लिए जाना जाता रहा है। लाखों खिलते हुए लिलियम फूलों ने इस फीके और सूखे माहौल में एक शानदार और रंगीन बदलाव ला दिया है। यहां खिला हुआ हर फूल हिम्मत और मजबूती की मिसाल है, जो साबित करता है कि सबसे मुश्किल हालात में भी ज़िंदगी और खूबसूरती पनप सकती है। इस प्रयोग की कामयाबी सिर्फ खेती के क्षेत्र में सफलता ही नहीं है; यह लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने, इको-टूरिज़्म को बढ़ावा देने और लद्दाख की पहचान को बदलने की दिशा में एक रंगीन क्रांति है।"

लेह में पायलट प्रोजेक्ट की सफलता को देखते हुए, LG ने बाकी छह जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को भी अपने-अपने इलाकों में ज़्यादा कीमत वाले फूलों की खेती के इस मॉडल को अपनाने का निर्देश दिया है। कारगिल, द्रास, शाम, चांगथांग और ज़ंस्कार के डिप्टी कमिश्नरों को निर्देश दिया गया है कि वे हर जिले में फूलों के खेत विकसित करने के लिए कम से कम 20 एकड़ जमीन की पहचान करें। इस पहल का मकसद अगले साल तक कम से कम 200 एकड़ जमीन पर ज़्यादा कीमत वाले फूलों की खेती करना है, जिससे लद्दाख के ऊबड़-खाबड़ इलाकों में लिलियम और दूसरे कीमती फूलों के रंग-बिरंगे खेत तैयार हो सकें।

खास बात यह है कि लेह में 25 लाख से ज़्यादा फूलों वाला लिलियम का खेत LG सक्सेना के लगातार मार्गदर्शन और देखरेख में सिर्फ दो महीनों में तैयार किया गया। 17 सितंबर 2026 को आम जनता के लिए खोले जाने के बाद से इस फूलों के खेत को ज़बरदस्त प्रतिक्रिया मिली है और हर दिन सैकड़ों लोग इन फूलों को देखने आ रहे हैं।

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