डायबिटीज के मरीज में हार्ट अटैक का खतरा, संकेत दे सकता है बढ़ा हुआ ब्लड शुगर
September 22, 2026
शरीर में बढ़े हुए ब्लड शुगर को आमतौर पर सिर्फ डायबिटीज से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसका असर केवल डायबिटीज तक सीमित नहीं है। डॉक्टर सौरभ चोपड़ा (सीनियर कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, फोर्टिस हॉस्पिटल मानेसर) के अनुसार, लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर का रहना हार्ट और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए ब्लड शुगर में होने वाले बदलावों को समय रहते पहचानना दिल की बीमारियों के जोखिम को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।
साल 2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में कम उम्र में मधुमेह की शुरुआत और आगे चलकर हृदय रोग के जोखिम के बीच संबंध देखा गया। इस रिसर्च में 4,931 लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि 40 साल की उम्र से पहले डायबिटीज का पता चलने वाले लोगों में आगे चलकर हार्ट की बीमारियों का खतरा अधिक था। रिसर्च में यह भी पाया गया कि कम उम्र से लंबे समय तक रक्त में अधिक शर्करा रहने का संबंध आगे चलकर हृदय संबंधी बीमारी के बढ़ते जोखिम से था।
इसका मतलब ये है कि ब्लड शुगर की एक रिपोर्ट को केवल उस समय की स्थिति के रूप में नहीं देखना चाहिए। यह भी अहम है कि ब्लड शुगर कितने समय तक अधिक रहता है। लंबे समय तक बढ़ा हुआ शुगर शरीर में अन्य जोखिम कारकों के साथ मिलकर हार्ट और रक्त वाहिकाओं पर असर डाल सकती है।
डायबिटीज से पहले की अवस्था यानि प्री डायबिटिक को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 2026 में जारी मधुमेह संबंधी चिकित्सकीय मानकों में प्री डायबिटिक को हार्ट की बीमारियों के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है। ऐसी स्थिति में रक्तचाप, खून में फैट और दूसरे हृदय संबंधी जोखिम कारकों की समय पर पहचान जरूरी है।
डायबिटीज के साथ हृदय रोग, मस्तिष्काघात और हृदय की कार्यक्षमता कमजोर होने का जोखिम बढ़ सकता है। यही कारण है कि ब्लड शुगर को कंट्रोल रखना केवल डायबिटीज से जुड़ी मुश्किलों को रोकने के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि लंबे समय में हार्ट की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। केवल खाली पेट की रक्त शर्करा देखकर हृदय संबंधी पूरे जोखिम का आकलन नहीं किया जा सकता। खून में तीन महीने की औसत शुगर का लेवल, ब्लड प्रेशर, खून में फैट, वजन, धूम्रपान की आदत, गुर्दों का स्वास्थ्य और परिवार में हृदय रोग का इतिहास जैसे कई पहलुओं को साथ में देखना आवश्यक है।
जोखिम की पहचान जितनी जल्दी होती है, उसे कम करने के लिए उतना अधिक समय उपलब्ध रहता है। संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, उचित वजन बनाए रखना और चिकित्सक की सलाह के अनुसार उपचार लेना रक्त शर्करा के साथ हृदय संबंधी जोखिम को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। खास तौर पर युवाओं में बढ़ा ब्लड शुगर केवल भविष्य में होने वाले मधुमेह की चेतावनी मानकर छोड़ देना उचित नहीं है। कम उम्र से लंबे समय तक खून में शुगर बढ़ना आगे चलकर हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकता है। इसलिए रक्त शर्करा में लगातार असामान्य बदलाव पाए जाने पर समय पर जांच जरूरी है। हार्ट की बीमारी कई सालों में धीरे-धीरे पैदा होती हैं। शुरुआती स्टेज में हमेशा स्पष्ट लक्षण दिखाई दें, ऐसा भी जरूरी नहीं है। ऐसे में ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने से हार्ट को हेल्दी रखने में मदद मिल सकती है।
