लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में आगामी विधानसभा चुनावों को तय समय से कुछ महीने पहले (दिसंबर 2026 या जनवरी 2027) कराए जाने की अटकलों पर जोरदार बहस जारी है। चुनाव आयोग ने हाल ही में उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का ऐलान किया है, लेकिन मतदान की तारीख 16 अक्टूबर 2026 तय की गई है।
यूपी के 10 राज्यसभा सदस्यों का 6 साल का नियमित कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। नियमानुसार, सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव कराने की यह एक सामान्य और संवैधानिक प्रक्रिया है, न कि कोई विशेष फैसला।
यूपी की 18वीं विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 तक है। चुनाव आयोग के नियमानुसार किसी भी राज्य का चुनाव उसका कार्यकाल समाप्त होने के 6 महीने के भीतर कराया जा सकता है। प्रशासनिक हलकों में चर्चा जरूर है कि 2027 की जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में प्रस्तावित होने के कारण चुनाव फरवरी-मार्च की जगह दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 में कराए जा सकते हैं। हालांकि, अभी तक इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।
उत्तर प्रदेश में यदि चुनाव का पहिया कुछ महीने पहले घूमता है, तो इसके पीछे केवल प्रशासनिक कारण (जनगणना) नहीं, बल्कि रणनीतिक समीकरण भी बड़े कारण हैं।
विधानसभा चुनावों से ठीक पहले होने जा रहा राज्यसभा चुनाव (10 सीटें) भाजपा और समाजवादी पार्टी के लिए अपना शक्ति-प्रदर्शन और गठबंधन की एकजुटता परखने का बड़ा टेस्ट है। मौजूदा 397 विधायकों के आंकड़े के हिसाब से एनडीए के पास लगभग 7 और सपा के पास 2 सीटें आसानी से निकालने का संख्या बल है। 10वीं सीट को लेकर होने वाली जोड़-तोड़ आगामी विधानसभा चुनाव का मूड तय करेगी।
चुनाव की घोषणा से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार की खबरें अमूमन यूपी के क्षेत्रीय, सामाजिक और जातीय समीकरणों (ओबीसी, दलित और पूर्वी यूपी के चेहरों) को साधने के लिए बनाई जाती हैं। चुनावी वर्ष में केंद्रीय कैबिनेट में फेरबदल कर असंतुष्ट गुटों को साधना और सहयोगियों को एकजुट रखना शीर्ष नेतृत्व की रणनीति का हिस्सा रहता है।
समय से पहले चुनाव की सुगबुगाहट के बीच मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने सभी 403 सीटों पर अपनी तैयारी तेज कर दी है। वहीं सत्ताधारी भाजपा भी लगातार सांगठनिक रैलियों और विकास योजनाओं के लोकार्पण के जरिए चुनावी मोड में है।
यूपी की राजनीति में जब भी राज्यसभा या विधान परिषद के चुनाव करीब आते हैं, तब-तब विधानसभा चुनाव की समय-सीमा को लेकर अटकलें तेज हो जाती हैं। यह स्पष्ट है कि राज्यसभा चुनाव अपने नियमित समय चक्र के अनुसार हो रहे हैं, लेकिन जनगणना और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को देखते हुए चुनाव को कुछ सप्ताह पहले (दिसंबर-जनवरी) कराने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।
