Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS
ऑनलाइन भुगतान करें
Pay Now

तेल के बाद सऊदी अरब को मिला नया ‘खजाना’


सऊदी अरब ने मदीना क्षेत्र में करीब 11 करोड़ टन अयस्क के बड़े भंडार की खोज का ऐलान किया है। इसमें भारी मात्रा में दुर्लभ खनिज यानी कि 'रेयर अर्थ मिनरल्स' के साथ-साथ यूरेनियम भी मौजूद है। सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी कि IAEA के सम्मेलन में इसकी जानकारी दी। यह खोज ऐसे समय में सामने आई है, जब सऊदी और अमेरिका के बीच परमाणु ऊर्जा और रणनीतिक खनिजों को लेकर सहयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में इस खोज को सऊदी अरब के लिए आर्थिक और रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी ऊर्जा मंत्री ने बताया कि मदीना में जबल सय्यिद परियोजना में किए गए भूगर्भीय सर्वे और खोज के दौरान करीब 11 करोड़ टन अयस्क के संसाधनों का अनुमान लगाया गया है। इस अयस्क में दुर्लभ खनिजों की मात्रा काफी ज्यादा है। खास तौर पर इसमें भारी दुर्लभ खनिज की अच्छी मात्रा पाई गई है। इसके अलावा यूरेनियम की भी संभावनाएं काफी मजबूत मिली हैं। मंत्री ने IAEA के सम्मेलन में कहा कि जबल सय्यिद में खोज और भूगर्भीय अध्ययनों से करीब 11 करोड़ टन अयस्क के संसाधन होने का अनुमान है।

सऊदी अरब की इस घोषणा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि कुछ महीने पहले ही अमेरिका और सऊदी अरब ने नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को औपचारिक रूप दिया था। 22 जुलाई को अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। अमेरिकी ऊर्जा विभाग के मुताबिक, इन समझौतों ने कई दशकों तक चलने वाली अरबों डॉलर की साझेदारी के लिए कानूनी आधार तैयार किया है। इससे अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब के नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में ज्यादा पहुंच भी मिलेगी।

सऊदी ऊर्जा मंत्री ने बताया कि रणनीतिक खनिजों की खोज और इस क्षेत्र में सहयोग को नवंबर 2025 में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अमेरिका यात्रा के बाद और गति मिली। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों, धातुओं और सप्लाई चेन को लेकर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनाई थी। इसी दौरान सऊदी सरकारी खनन कंपनी मआदेन और अमेरिकी कंपनी एमपी मटीरियल्स के बीच भी साझेदारी हुई। जबल सय्यिद मदीना क्षेत्र में जेद्दा से करीब 350 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है। यह इलाका पहले से ही बड़े और कीमती रेयर अर्थ भंडार के लिए जाना जाता है।

अमेरिका और सऊदी अरब ने महत्वपूर्ण खनिजों, धातुओं और यूरेनियम को लेकर सहयोग के लिए एक स्ट्रैटिजिक फ्रेमवर्क तैयार किया है। इसके तहत अमेरिकी रक्षा विभाग सऊदी अरब में बनने वाले नए रेयर अर्थ प्रोसेसिंग प्लांट की लागत का 49 फीसदी हिस्सा देने पर सहमत हुआ है। इस परियोजना में सऊदी कंपनी मआदेन की 51 फीसदी नियंत्रक हिस्सेदारी होगी। अमेरिकी कंपनी एमपी मटीरियल्स भी इसमें साझेदार है। एमपी मटीरियल्स अमेरिका की एकमात्र ऐसी कंपनी है, जो फिलहाल अमेरिका में रेयर अर्थ की खदान और उसका प्रोसेसिंग प्लांट चलाती है।

सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के एक विश्लेषण के मुताबिक, सऊदी उद्योग और खनिज संसाधन मंत्रालय तथा सरकारी खनन कंपनी मआदेन के आंकड़ों के आधार पर जबल सय्यिद को दुनिया में रेयर अर्थ भंडार के मामले में चौथे स्थान पर माना जाता है। अनुमान के मुताबिक यहां करीब 5.52 लाख टन भारी रेयर अर्थ तत्व मौजूद हैं जिनमें डिस्प्रोसियम और टर्बियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं। इसके अलावा करीब 3.55 लाख टन हल्के रेयर अर्थ तत्व होने का अनुमान है। इनमें नियोडिमियम और प्रसीओडिमियम जैसे खनिज शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल आधुनिक तकनीक और उद्योगों में किया जाता है।

CSIS के इसी विश्लेषण के मुताबिक जबल सय्यिद में करीब 31 हजार टन यूरेनियम संसाधन भी मौजूद हो सकता है। रेयर अर्थ खनिजों और यूरेनियम का एक ही क्षेत्र में मिलना सऊदी अरब के लिए खास महत्व रखता है। विश्लेषण के मुताबिक इससे सऊदी अरब को अपना परमाणु ईंधन चक्र विकसित करने में मदद मिल सकती है। भविष्य में सऊदी अरब यहां से तैयार सामग्री अमेरिका को निर्यात करने की क्षमता भी विकसित कर सकता है।

सऊदी अरब में रेयर अर्थ तत्वों की खोज का कुल अनुमानित मूल्य भी तेजी से बढ़ा है। सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक नवंबर 2025 तक देश में रेयर अर्थ तत्वों की खोज का मूल्य करीब 100 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। यह आंकड़ा 2018 की तुलना में करीब 90 फीसदी ज्यादा है। सऊदी जियोलॉजिकल सर्वे के अध्ययनों में रेयर अर्थ और दूसरे खनिज संसाधनों के लिए दो उन्नत स्तर के खोज क्षेत्रों की पहचान भी की गई है। इन दोनों क्षेत्रों में कुल मिलाकर करीब 64.4 करोड़ टन संसाधन होने का अनुमान है।

रेयर अर्थ खनिज आज की आधुनिक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टर्बाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा तकनीक और कई आधुनिक उपकरणों में किया जाता है। वहीं यूरेनियम परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए प्रमुख कच्चा माल है। ऐसे में रेयर अर्थ और यूरेनियम दोनों की मौजूदगी सऊदी अरब को ऊर्जा के साथ-साथ रणनीतिक खनिजों के वैश्विक बाजार में भी मजबूत स्थिति दे सकती है। अगर सऊदी अरब इन संसाधनों के खनन, प्रसंस्करण और निर्यात की क्षमता विकसित करता है, तो वह आने वाले वर्षों में वैश्विक रेयर अर्थ सप्लाई चेन में एक महत्वपूर्ण देश बन सकता है।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |