संयुक्त बार की आमसभा में सर्वसम्मति से निर्णय, दाखिल-खारिज प्रक्रिया में देरी और व्यवहार को लेकर जताया रोष
मेरठ/मवाना। बार एसोसिएशन मवाना एवं मवाना सिविल बार एसोसिएशन की संयुक्त आमसभा शनिवार को बार हॉल मवाना में आयोजित हुई। बैठक में तहसीलदार मवाना के न्यायालय के बहिष्कार को अनिश्चितकालीन रूप से जारी रखने का निर्णय लिया गया। अधिवक्ताओं ने तहसीलदार के व्यवहार और दाखिल-खारिज प्रक्रिया को लेकर कई आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई।
आमसभा की अध्यक्षता बल्लभ एडवोकेट एवं राजेंद्र तोमर एडवोकेट ने की, जबकि संचालन सचिव महमपाल सिंह एडवोकेट एवं नटवर सिंह राणा एडवोकेट ने किया। बैठक में दोनों बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि तहसीलदार मवाना का व्यवहार अधिवक्ताओं के प्रति उचित नहीं है। उनका कहना था कि अविवादित दाखिल-खारिज मामलों की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी की जा रही है और अमलदरामद नहीं कराया जा रहा है, जिससे वादकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अधिवक्ताओं ने भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाए, हालांकि ये आरोप सभा में लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि तहसीलदार अपने चैंबर में उपलब्ध नहीं रहते तथा जनता दर्शन भी नहीं करते। अधिवक्ताओं के अनुसार दाखिल-खारिज मामलों में 1359 फसली, 41, 45, नक्शा 23 तथा वर्ष 1951 में भूमि की नियत जैसे दस्तावेजों और तथ्यों से संबंधित शर्तें लगाई जा रही हैं, जिससे प्रक्रिया जटिल हो रही है।
अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि इन प्रक्रियाओं के चलते वादी पक्ष के अधिवक्ताओं और वादकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सभा में कहा गया कि इस स्थिति को लेकर अधिवक्ताओं में काफी रोष है और तहसीलदार के न्यायालय में वकालत करना मुश्किल हो गया है।
बार पदाधिकारियों के अनुसार, 19 सितंबर 2026 से तहसीलदार मवाना के न्यायालय का बहिष्कार किया जा रहा था। संयुक्त आमसभा में सर्वसम्मति से इस बहिष्कार को अब अनिश्चितकाल तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
बैठक में यह भी तय किया गया कि दोनों बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं सचिव तहसीलदार मवाना के न्यायालय की मॉनिटरिंग करेंगे। संयुक्त बार के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि कोई अधिवक्ता बहिष्कार के दौरान तहसीलदार के न्यायालय में कार्य करता पाया गया तो उसके विरुद्ध बार के स्तर से आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अधिवक्ताओं ने कहा कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक बहिष्कार जारी रहेगा। संयुक्त बार के इस निर्णय के बाद तहसीलदार न्यायालय में न्यायिक कार्य प्रभावित होने की स्थिति बन गई है।
