Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS
ऑनलाइन भुगतान करें
Pay Now

लखनऊः एलडीए का श्जीरो टॉलरेंसश् सर्कस ! एक तरफ सील ताक पर, दूसरी तरफ सीतापुर रोड से लेकर कानपुर बाईपास तक हो रहे सुपरफास्ट अवैध निर्माण


लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण का श्जीरो टॉलरेंसश् का नारा कागजी फाइलों में जितनी रफ्तार से दौड़ता है, धरातल पर उसकी हवा उतनी ही तेजी से निकल जाती है। शहर में आजकल नियमों की धज्जियां उड़ाने का ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है, जहां सील और बुलडोजर सिर्फ फोटो खिंचवाने और प्रेस नोट जारी करने के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं।

जोन-7 के व्यस्त कानपुर बाईपास पर स्थित श्अरीना होटलश् एलडीए के कानून की असलियत उजागर कर रहा है। कुछ समय पहले प्राधिकरण के दस्ते ने गाजे-बाजे के साथ जिस इमारत पर सील चिपकाई थी, उसी सील के साये में आज निर्माण कार्य अपनी बेधड़क शैली में जारी है। आला अफसरों की गाड़ियां इसी रास्ते से गुजरती हैं, लेकिन लगता है उन्हें अवैध इमारतों की जगह सिर्फ ष्विकासष् नजर आता है। बिना मजबूत ष्अंदरूनी सेटिंगष् के किसी बिल्डर की क्या मजाल कि सरकारी आदेशों को ठेंगा दिखा दे? साफ जाहिर है कि सीलिंग की कार्रवाई महज कागजी खानापूर्ति और नए रास्ते खोलने का एक छलावा थी।

कहानी सिर्फ कानपुर बाईपास तक सीमित नहीं है। प्रवर्तन जोन-4 के सीतापुर रोड (खदरा, मदेयगंज थाने के पास) पर भी नियमों को ताक पर रखकर ईंट पर ईंट जोड़ी जा रही है। स्थानीय निवासियों ने बिना स्वीकृत मानचित्र के चल रहे इस अवैध निर्माण की शिकायतें अफसरों के दरवाजों तक कई बार पहुंचाईं। नतीजा? शिकायत मिलते ही निर्माण रुकने के बजाय उसकी रफ्तार दोगुनी हो गई! ऐसा लगता है कि शिकायतों से बिल्डरों का हौसला पस्त होने के बजाय और बुलंद हो जाता है।

लखनऊ को एक व्यवस्थित शहर बनाने के दावे अब प्रशासनिक व्यवस्था के मुंह पर तमाचा बनते दिख रहे हैं। जब सरकारी सील सिर्फ हवा में टंगी रह जाए और शिकायतों के बाद भी काम तेजी से चलता रहे, तो समझ लेना चाहिए कि प्राधिकरण का डर खत्म हो चुका है। अब देखना यह है कि एलडीए के जिम्मेदार अधिकारी अपनी इस लंबी नींद से कब जागते हैं, या फिर कागजी दावों की आड़ में इस श्अवैध खेलश् का दर्शक बने रहना ही पसंद करते हैं।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |