बच्चों में क्यों बढ़ रही फैटी लिवर की समस्या, क्या है इसके पीछे की असल वजह ?
September 19, 2026
बच्चों में फैटी लिवर की समस्या अब तेजी से सामने आ रही है और इसका सबसे बड़ा कारण बदलती लाइफस्टाइल है। पहले फैटी लिवर को आम तौर पर वयस्कों की समस्या माना जाता था, लेकिन आज कम उम्र के बच्चों में भी इसके मामले देखे जा रहे हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि बच्चों में फैटी लिवर की समस्या क्यों बढ़ते जा रही है। डॉ. रमेश गर्ग, सीनियर डायरेक्टर और HOD, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, फ़ोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग़ बता रहे हैं कि बच्चों में क्यों फैटी लिवर के मामले बढ़ते जा रहे हैं। चलिए जानते हैं।
बच्चों में फैटी लिवर का प्रमुख कारण अधिक वजन और मोटापा है। जब बच्चे की डाइट में लगातार ज्यादा कैलोरी, चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट शामिल होते हैं और फिजिकल एक्टिविटी कम होती है, तो शरीर में एक्सट्रा फैट जमा होने लगता है। इसका असर लिवर पर भी पड़ता है और लिवर सेल्स में अतिरिक्त चर्बी जमा हो सकती है। जंक फूड, पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय पदार्थ, कोल्ड ड्रिंक्स, ज्यादा चीनी वाली चीजें और बार-बार बाहर का खाना इस समस्या का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम के कारण बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ना और खेलकूद या आउटडोर एक्टिविटी कम होना भी एक महत्वपूर्ण कारण है। कुछ बच्चों में जेनेटिक कारणों की वजह से भी ये समस्या होती है।
शुरुआती फैटी लिवर में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। कुछ बच्चों में थकान, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में हल्की परेशानी या वजन बढ़ने जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं। लेकिन केवल लक्षणों के आधार पर इसका पता लगाना मुश्किल है। यह समझना जरूरी है कि हर मोटे बच्चे को फैटी लिवर नहीं होता और हर फैटी लिवर वाला बच्चा मोटा हो, यह भी जरूरी नहीं है। लेकिन ज्यादा वजन, पेट के आसपास ज्यादा चर्बी और खराब खान-पान वाले बच्चों में इसका जोखिम ज्यादा रहता है।
फैटी लिवर से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है बच्चों को घर का खाना दें, मीठे और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का सेवन कराने से बचाएं। रोजाना फिजिकल एक्टिविटी करें और स्क्रीन टाइम कम करें। यदि बच्चे का वजन तेजी से बढ़ रहा है या डॉक्टर को फैटी लिवर का संदेह है, तो समय पर जांच और इलाज कराना महत्वपूर्ण है। अच्छी बात यह है कि शुरुआती चरण में लाइफस्टाइल में सही बदलाव से लिवर में जमा अतिरिक्त फैट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
