लखनऊ। राजधानी के सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत अमौसी इलाके से एक गंभीर और चैंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां नगर निगम की बहुमूल्य सरकारी जमीन पर दबंगों और कथित भू-माफियाओं द्वारा एक बार फिर अवैध कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि जिस भूमि को करीब तीन वर्ष पूर्व नगर निगम के प्रवर्तन दस्ते ने कड़ी कार्रवाई करते हुए ध्वस्त और कब्जामुक्त कराया था, उसी भूमि पर भू-माफिया अब दोबारा सक्रिय हो गए हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से इस सरकारी जमीन पर धड़ल्ले से मिट्टी डलवाकर समतलीकरण का कार्य कराया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पास में स्थित एक निजी वेयरहाउस तक गाड़ियों के आने-जाने के लिए इस सरकारी जमीन का इस्तेमाल कर अवैध रास्ता तैयार किया जा रहा है। दिन-रात चल रहे इस निर्माणध्भराव कार्य से क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश और गुस्सा व्याप्त है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय नागरिकों ने स्थानीय वार्ड पार्षद गीता देवी से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है। नागरिकों ने मांग की है कि नगर निगम की इस कीमती संपत्ति को तत्काल कब्जामुक्त कराया जाए। 3 साल पहले ध्वस्त किए गए कब्जे पर दोबारा काम शुरू होने की निष्पक्ष जांच हो। सरकारी जमीन को नुकसान पहुंचाने वाले दबंगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज की जाए।
क्षेत्रवासियों का साफ तौर पर कहना है कि यदि शासन-प्रशासन और नगर निगम की टीम ने समय रहते इस अवैध कब्जे को नहीं रोका, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि वे सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम के मॉनिटरिंग सिस्टम और कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। तीन वर्ष पूर्व ध्वस्त कराई गई सरकारी जमीन की दोबारा सुध क्यों नहीं ली गई ?आखिर किसकी शह या लापरवाही से दबंगों ने दोबारा मिट्टी डलवाकर रास्ता बनाने का दुस्साहस किया ? क्या इस पूरे मामले में निचले स्तर के कर्मचारियों या अधिकारियों की मूकसहमति शामिल है ?
फिलहाल देखना यह होगा कि मामला उजागर होने के बाद नगर निगम प्रशासन कितनी मुस्तैदी से बुलडोजर चलाकर इस जमीन को सुरक्षित करता है।
