लखनऊ।पांच दिवसीय बैंकिंग प्रणाली लागू करने और भेदभाव रहित श्परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिवश् योजना की मांग को लेकर राजधानी लखनऊ में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंककर्मियों ने शुक्रवार को एकदिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल की। इस दौरान शहर भर की शाखाओं में ताले लटके रहे। हजरतगंज स्थित इंडियन बैंक परिसर में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के राज्य संयोजक कॉमरेड वाई.के. अरोड़ा के नेतृत्व में विशाल विरोध सभा और प्रदर्शन आयोजित किया गया।
यूएफबीयू के मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी ने बताया कि हड़ताल के कारण लखनऊ की 905 बैंक शाखाएं पूरी तरह बंद रहीं, जिससे लगभग 10,000 अधिकारी और कर्मचारी काम से दूर रहे। फोरम के जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि बैंककर्मी लंबे समय से विरोध प्रदर्शन, काला बैज पहनकर काम करने और सोशल मीडिया अभियानों के जरिए अपनी मांगें उठा रहे थे, लेकिन सुनवाई न होने पर उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
कॉमरेड दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि जब रिजर्व बैंक (त्ठप्), स्प्ब्, सेबी और नाबार्ड जैसे संस्थानों में हफ्ते में 5 दिन काम की व्यवस्था लागू है, तो बैंकों के साथ यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है ? कॉमरेड एस.के. संगतानी और लक्ष्मण सिंह ने सरकार द्वारा लागू की गई पीएलआई योजना को भेदभावपूर्ण बताते हुए इसे तुरंत रोकने की मांग की। उन्होंने उच्चाधिकारियों को दिए गए लाखों रुपये के प्रोत्साहन बोनस को तत्काल वापस लेने की भी बात कही। कॉमरेड वी.के. माथुर, संदीप सिंह, अशोक अग्रवाल और सचिन केशरवानी ने कहा कि द्विपक्षीय समझौतों से जुड़े लंबित मुद्दों का शीघ्र समाधान किया जाए, क्योंकि अब कर्मचारी आश्वासन नहीं बल्कि परिणाम चाहते हैं।
इस विरोध प्रदर्शन में प्रियंका, नमिता, शिल्पी, स्वाति सिंह और अनुषा दुबे समेत बड़ी संख्या में महिला बैंक नेताओं और अन्य पदाधिकारियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
बैंक यूनियनों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों का न्यायसंगत समाधान नहीं निकालती, संघर्ष जारी रहेगा। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो 28, 29 और 30 सितंबररू तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल। अक्टूबर माह मे अनिश्चितकालीन राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल की जाएगी।
