मुसाफिरखानाः गंदे पानी में फंसा रामनगर! अधिकारियों ने देखा हाल, फिर भी नहीं खुलीं पुलियाएं
September 01, 2026
मुसाफिरखाना/अमेठी। क्षेत्र के ग्राम रामनगर उर्फ नया कोर्ट में जल निकासी की समस्या ग्रामीणों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनी हुई है। गल्ला मंडी से दरौली जाने वाली सड़क पर पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से कराए गए निर्माण के बाद गांव के आगे तीन क्रॉसिंग पुलिया बनाई गई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इन तीनों पुलियों के जाम होने के कारण पानी की निकासी पूरी तरह बाधित हो गई है। इसके चलते गांव के आसपास बड़े पैमाने पर गंदा पानी जमा है और खेतों में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है।ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के पानी के साथ नालियों और आसपास से आने वाला गंदा पानी पुलियों के रास्ते आगे नहीं निकल पा रहा है। पानी कई दिनों से एक ही स्थान पर जमा होने के कारण दुर्गंध फैल रही है। वहीं, जमा पानी में मच्छरों की भरमार हो गई है, जिससे ग्रामीणों में संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। गांव के लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों ने बताया कि जलभराव का असर केवल गांव की आबादी तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के खेत भी इसकी चपेट में आ गए हैं। खेतों में गंदा पानी भरा होने से फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है। इसके अलावा आने-जाने वाले ग्रामीणों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों को गंदे पानी तथा कीचड़ के बीच से गुजरना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों ने मौके का जायजा भी लिया था, लेकिन निरीक्षण के बाद अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। अधिकारियों के निरीक्षण के बावजूद पुलियों की सफाई और जल निकासी शुरू न होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग से मांग की है कि तीनों जाम पड़ी पुलियों को तत्काल खुलवाकर जल निकासी की व्यवस्था बहाल कराई जाए। साथ ही गांव और खेतों में जमा गंदे पानी की निकासी कराकर मच्छरों से बचाव के लिए दवा का छिड़काव कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव की समस्या को यदि जल्द दूर नहीं किया गया तो मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से डेंगू, मलेरिया सहित अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में विभाग को मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि ग्रामीणों को जलभराव, दुर्गंध और बीमारी के खतरे से राहत मिल सके।
