डॉक्टर से मारपीट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, शिवसेना पार्षद की जमानत रद्द
September 28, 2026
डॉक्टर से मारपीट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को दी गई जमानत रद्द कर दी है. कोर्ट ने इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश पर भी रोक लगा दी, जिसके तहत महाराष्ट्र सरकार की याचिका के बावजूद पार्षद को जमानत दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने साफ संदेश देने की बात कही कि मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ किसी भी तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जा सकती.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संदेश साफ और जोरदार होना चाहिए कि मेडिकल फ्रेटरनिटी को छुआ नहीं जा सकता. कोर्ट ने कहा कि डॉक्टर और मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोग लोगों की सेवा करते हैं और उनके साथ इस तरह हमला नहीं किया जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को तीन दिन के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है. कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें मामले में दोबारा हिरासत में जाना होगा.
महाराष्ट्र के कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (केडीएमसी) के शास्त्री नगर अस्पताल में 6 जुलाई को दो डॉक्टरों के साथ मारपीट का मामला सामने आया था. इस मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को पुलिस ने 9 जुलाई को गिरफ्तार किया था. घटना के बाद डॉक्टरों और मेडिकल संगठनों की ओर से विरोध जताया गया था. अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, एक महिला ने सीजेरियन ऑपरेशन के जरिए बच्चे को जन्म दिया था. जांच के दौरान पता चला कि नवजात की गर्दन में नाल दो बार लिपटी हुई थी. ऐसे में बच्चे को तत्काल विशेष चिकित्सा देखभाल की जरूरत थी. हालांकि, अस्पताल का नवजात गहन चिकित्सा कक्ष (एनआईसीयू) पहले से ही पूरी तरह भरा हुआ था. इसके चलते डॉक्टरों ने बच्चे के परिवार को उसे बेहतर और जरूरी इलाज के लिए किसी दूसरे अस्पताल में ले जाने की सलाह दी थी
बताया गया कि इसके बाद बच्चे के परिजनों ने शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे से संपर्क किया. उस समय डॉक्टर दूसरे मरीजों के इलाज में व्यस्त थे और परिवार की ओर से किए गए फोन का जवाब नहीं दे सके. इसके बाद आरोप है कि म्हात्रे अपने कुछ साथियों के साथ शास्त्री नगर अस्पताल पहुंचे. यहां उन्होंने डॉक्टरों से बच्चे के इलाज को लेकर बहस की. आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद डॉक्टरों के साथ मारपीट की गई.
पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था. फुटेज सामने आने के बाद मामला और गरमा गया. डॉक्टरों की ओर से घटना का विरोध किया गया और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई. मामले को लेकर डॉक्टरों के विरोध और दबाव के बीच पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 9 जुलाई को रमेश म्हात्रे को गिरफ्तार कर लिया था. बाद में मामला अदालत तक पहुंचा, जहां पार्षद को मिली जमानत को महाराष्ट्र सरकार ने चुनौती दी. इसी मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करते हुए म्हात्रे को तीन दिन के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है.
