लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत बॉन्डेड डॉक्टरों का असंतोष एक बड़े आंदोलन में तब्दील हो गया है। आज अपनी प्रमुख मांग ष्समान काम के लिए समान वेतनष् और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों को लेकर सैकड़ों डॉक्टरों ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (डीजीएचएस) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। बेहद निराशाजनक रहा कि भारी बारिश के बावजूद इन युवा चिकित्सकों को कार्यालय के मुख्य द्वार पर घंटों भीगते हुए इंतजार करना पड़ा, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें बातचीत के लिए अंदर बुलाने की शिष्टाचार नहीं दिखाई।
डॉक्टरों के अनुसार, उनकी नियुक्ति और कार्य प्रक्रिया पर निर्णय डीजीएचएस (महानिदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं) स्तर पर होना है। इससे पहले, चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय (डीजीएमई) ने इस संबंध में एक प्रस्ताव पत्र दिया था, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि अंतिम निर्णय डीजीएचएस लेगा। इसी प्रस्ताव पत्र को लेकर डॉक्टर अपनी उचित मांगों और चिंताओं को उच्च अधिकारियों के सामने रखने के लिए भारी संख्या में डीजीएचएस कार्यालय पहुंचे थे।
यह प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित था। लेकिन, जब डॉक्टर कार्यालय पहुंचे, तो गेट बंद थे। इस दौरान भारी बारिश शुरू हो गई, लेकिन गेट नहीं खोला गया। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि ष्भारी बारिश के बावजूद डीजीएचएस कार्यालय के मुख्य द्वार को नहीं खोला गया और डॉक्टरों को अंदर बुलाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई।ष् बड़ी संख्या में डॉक्टर लगातार भीड़ के बीच बारिश में खड़े रहने को मजबूर रहे। अपनी बात पहुंचाने आए चिकित्सकों के साथ इस प्रकार का व्यवहार अत्यंत निराशाजनक बताया जा रहा है।
बॉन्डेड डॉक्टरों का कहना है कि उनकी मांग कोई विशेष सुविधा प्राप्त करने की नहीं है, बल्कि बुनियादी अधिकारों की है। उनकी मुख्य मांग है कि उन्हें राज्य में कार्यरत अन्य डॉक्टरों के बराबर ही ष्समान बॉन्ड, समान सेवा तो समान वेतनष् मिले। वे अपमानजनक परिस्थितियों के बजाय ष्सम्मानजनक कार्य परिस्थितियोंष् की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों का स्पष्ट संदेश है कि ष्बॉन्डेड डॉक्टरों के साथ न्याय किया जाए।ष्
इस प्रशासनिक उदासीनता और उपेक्षा से आहत होकर, यूपी बॉन्डेड डॉक्टरों (चिकित्सा अधिकारियों) ने अपने आंदोलन को तेज करने का फैसला किया है। वे आज शाम को ष्वेतन समानता एवं पारिश्रमिक संबंधी विसंगति के समाधानष् की मांग के लिए एक विशाल कैंडल मार्च दिनांकरू 1 सितंबर 2026 (सोमवार) शाम 6रू00 बजे, 1090 चैराहा, लखनऊ मे निकला जायेगा।
सोशल मीडिया और पोस्टर के माध्यम से, डॉक्टर समुदाय और नागरिक समाज को इस मार्च में शामिल होने का आह्वान कर रहे हैं। उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए लिखा हैरू ष्हम सेवा के लिए तैयार हैं, हमें समानता, सम्मान और हमारी सेवा के अनुरूप उचित पारिश्रमिक चाहिए।ष् पोस्टर में डॉक्टरों की मांगों को जोरदार तरीके से उठाया गया है, जैसे ष्समान काम, समान वेतनष्, ष्वेतन में भेदभाव नहीं चलेगाष्, और ष्म्ुनंस च्ंल म्ुनंस त्मेचमबजष्।
स्वास्थ्य विभाग के इस तरह के रवैये ने युवा डॉक्टरों को निराश किया है। वे कहते हैं कि ष्देश के भविष्य के डॉक्टरों को इस प्रकार बारिश में बाहर खड़ा रखना अत्यंत निराशाजनक है।ष् अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या शाम के कैंडल मार्च और इस बढ़ते आंदोलन के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय और डीजीएचएस प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा।
