पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार को लेकर आया बड़ा अपडेट, 1978 की सूची से हुआ पूरा मिलान, सभी सामान सुरक्षित पाए गए
September 01, 2026
ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में रखे भगवान महाप्रभु श्रीजगन्नाथ के बहुमूल्य आभूषण और अन्य कीमती सामान सुरक्षित पाए गए हैं। मंदिर अधिकारियों के मुताबिक, अब तक की जांच में इनका मिलान 1978 में तैयार की गई सूची से पूरी तरह हो रहा है। रत्न भंडार में रखे आभूषणों और कीमती वस्तुओं की गणना और मिलान का काम राज्य सरकार की ओर से तय नियमों और मानक संचालन प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
श्रीमंदिर के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने जानकारी देते हुए कहा कि आभूषणों में लगे कीमती रत्नों की बारीकी से पहचान और जांच की जा रही है। इसलिए इस पूरी प्रक्रिया को जल्दबाजी में पूरा करने के बजाय सटीक तरीके से किया जा रहा है। ऐसे में यह बताना फिलहाल मुश्किल है कि गणना और मिलान का काम पूरी तरह कब तक पूरा होगा। मंदिर के रत्न भंडार की सूची तैयार करने और मिलान की यह प्रक्रिया मार्च 2026 में शुरू हुई थी। यह काम करीब 48 साल के अंतराल के बाद दोबारा शुरू किया गया है। पहले चरण में रत्न भंडार की गणना का काम 25 मार्च से 23 मई के बीच पूरा किया गया था। इसके बाद रथयात्रा के दौरान भगवान के श्रृंगार में इस्तेमाल होने वाले रत्न-आभूषणों की गिनती का काम 19 जुलाई से शुरू किया गया।
सोमवार को महाप्रभु की सुबह की धूप नीति पूरी होने के बाद सुबह 11:30 बजे से शाम 6:45 बजे तक आभूषणों और अन्य वस्तुओं का बारीकी से मिलान किया गया। यानी करीब 7 घंटे 25 मिनट तक यह प्रक्रिया चली। मुख्य प्रशासक के अनुसार, यह काम मंगलवार को भी जारी रहेगा। रत्न भंडार जैसे संवेदनशील स्थान पर चल रही इस पूरी प्रक्रिया को लेकर सुरक्षा और पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में हो रही है। केवल अधिकृत लोगों को ही अंदर जाने की अनुमति है। इसके अलावा पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जा रही है। रत्न भंडार में रखे आभूषणों और कीमती सामान की वैज्ञानिक तरीके से 3D मैपिंग और कैटलॉगिंग भी की जा रही है।
इस बार आभूषणों में लगे कीमती रत्नों की पहचान पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए प्रमाणित जेमोलॉजिस्ट यानी रत्न विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, भगवान के आभूषणों में हीरा, नीलम, मोती और माणिक्य जैसे बहुमूल्य रत्न जड़े हुए हैं। इन रत्नों की पहचान और उनका मूल्यांकन करने में समय लग रहा है। एक सेट के मिलान में औसतन करीब 30 मिनट का समय लग रहा है। यही वजह है कि पूरी प्रक्रिया अपेक्षा से अधिक समय ले रही है। बताया जा रहा है कि 1978 में जब पिछली बार रत्न भंडार की सूची तैयार की गई थी, तब विशेषज्ञता की कमी के कारण कुछ बहुमूल्य रत्नों की पूरी तरह जांच नहीं हो सकी थी। इस बार रत्न विशेषज्ञों की मदद से उनकी पहचान और जांच की जा रही है।
रत्न भंडार में श्रद्धालुओं की ओर से समय-समय पर दान किए गए आभूषणों की अलग सूची तैयार की जा रही है। वहीं, बचे हुए स्वर्ण आभूषणों और अन्य मूल्यवान सामग्रियों की गिनती करके उन्हें भंडार में सेवायतों के सुपुर्द किया गया है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि रत्न भंडार के भीतरी हिस्से में कुछ मूल्यवान वस्तुएं लकड़ी के बक्सों में रखी हुई हैं। इन वस्तुओं का माप लिया जा चुका है और इनकी विस्तृत प्रक्रिया आने वाले दिनों में पूरी की जाएगी।
आभूषणों और कीमती वस्तुओं के वजन और माप का काम पूरा होने के बाद उनकी आधिकारिक सूची के तीन सेट तैयार किए जाएंगे। इन सेटों को सुरक्षित तरीके से भीतरी रत्न भंडार में रखा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य रत्न भंडार में मौजूद हर आभूषण और मूल्यवान वस्तु का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करना और उसे पुरानी सूची से मिलाना है। श्रीमंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं को आश्वस्त किया है कि 1978 में तैयार की गई सूची के आधार पर आभूषण और कीमती सामान सुरक्षित हैं और उनका मिलान हो रहा है। इस संवेदनशील प्रक्रिया में न्यायमूर्ति, छत्तीसानियोग के नायक, जिलाधिकारी और अन्य अधिकृत सदस्य भी शामिल हैं।
