लखनऊ। एक तरफ जहां उत्तर प्रदेश सरकार स्वच्छ पेयजल और बेहतरीन नागरिक सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ राजधानी लखनऊ के सबसे हाई-प्रोफाइल हजरतगंज इलाके से शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। मुख्यमंत्री आवास से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित राम मोहन राय वार्ड के श्जयप्रकाश नगरश् में पिछले एक सप्ताह से नलों से गंदा, बदबूदार और बालू युक्त पानी आ रहा है। वीवीआईपी जोन में शामिल इस इलाके के लोग बूंद-बूंद साफ पानी के लिए तरस रहे हैं, लेकिन जलकल विभाग और नगर निगम कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है।
जयप्रकाश नगर के घरों में नलों को खोलते ही सीवर जैसी बदबू और काली रंगत वाला मटमैला पानी निकल रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें पानी को घंटों बाल्टी में भरकर रखना पड़ता है, ताकि बालू और मिट्टी नीचे बैठ सके, जिसके बाद उसे छानकर किसी तरह इस्तेमाल में लाया जा रहा है। खाना बनाने और पीने के पानी के लिए लोगों को या तो महंगे जार खरीदने पड़ रहे हैं या दूर-दराज से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है।
दूषित और दुर्गंधयुक्त पानी की लगातार सप्लाई से इलाके में हैजा, टाइफाइड, डायरिया और पीलिया जैसी गंभीर संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है। पिछले 7 दिनों से स्थानीय नागरिक लगातार जलकल विभाग और नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। लखनऊ नगर निगम, जलकल विभाग और जल निगम (जोन-1) के बीच तालमेल की कमी और घोर लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
हाल ही में इंदौर में दूषित पानी पीने से हुए भीषण हादसे के बाद पूरे देश में जल आपूर्ति को लेकर सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद, यूपी की राजधानी के केंद्र में ऐसी लापरवाही यह दर्शाती है कि जिम्मेदार अधिकारी कितने बेपरवाह हो चुके हैं।
स्थानीय निवासियों में इस अनदेखी को लेकर भारी आक्रोश है। जनता अब सीधा सवाल पूछ रही हैकृक्या नगर निगम जोन-1 और जलकल विभाग हजरतगंज जैसे इलाके में भी किसी बड़े हादसे या महामारी के फैलने का इंतजार कर रहे हैं ? अगर जल्द ही पाइपलाइन की लीकेज दुरुस्त कर साफ पानी की आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो नागरिक सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
