लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी के सबसे हाई-प्रोफाइल और अति-संवेदनशील वीवीआईपी इलाकों में कानून और नगर निगम के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने और अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई के कड़े निर्देश दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम जोन-1 की रहस्यमयी चुप्पी और ढिलाई के कारण सड़कों पर अतिक्रमण का साम्राज्य फल-फूल रहा है।
हैरानी की बात यह है कि सपा प्रदेश कार्यालय के ठीक बगल में गेट से सटाकर टीन-टप्पर डालकर अवैध दुकानें चलाई जा रही हैं। वीवीआईपी सुरक्षा वाले इस इलाके में, जहां से महज कुछ दूरी पर मुख्यमंत्री आवास है, वहां नाली और फुटपाथ घेरकर कमर्शियल गतिविधियां चलाई जा रही हैं। सवाल यह उठता है कि क्या नगर निगम के उड़नदस्ते और जोन-1 के अधिकारियों को ये दुकानें दिखाई नहीं देतीं या फिर किसी खास श्मौन सहमतिश् के तहत यह सब चल रहा है ?
अतिक्रमण केवल दुकानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राजधानी के प्रमुख चैराहों और सड़कों को खुलेआम श्ओपन ऑटोमोबाइल गैरेजश् में तब्दील कर दिया गया है।भाजपा कार्यालय, दारुलशफा और नगर निगम जोन-1 कार्यालय के ठीक बाहर दिन-रात गाड़ियां बेतरतीब ढंग से खड़ी रहती हैं। प्रसिद्ध शर्मा चाय, सरदार भटूरे और नोवेल्टी चैराहे से लेकर हजरतगंज थाने की नाक के नीचे तक फुटपाथ और मुख्य सड़कें अवैध पार्किंग व चार पहिया वाहनों की मरम्मत का अड्डा बनी हुई हैं। यही हाल दूसरी तरफ हरिओम मंदिर से लेकर निशात अस्पताल तक का है, जहां सड़क पर ही गाड़ियों की डेंटिंग-पेंटिंग और मरम्मत का काम धड़ल्ले से जारी है।
जिस नगर निगम जोन-1 के कार्यालय के सामने से रोज अफसर गुजरते हैं, उसी के बाहर सड़क पर गाड़ियां सुधर रही हैं और फुटपाथ गायब हैं। सड़क पर वाहन खड़े कर मरम्मत करने से पूरे हजरतगंज और आसपास के इलाकों में दिनभर भीषण जाम की स्थिति बनी रहती है। आम जनता घंटों ट्रैफिक में पिसने को मजबूर है, लेकिन पुलिस और नगर निगम की प्रवर्तन टीमें हाथ पर हाथ धरे बैठी हैं।
वीवीआईपी जोन की इस बदहाली ने नगर निगम की कार्यशैली और मॉनिटरिंग सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। जनता अब सवाल पूछ रही है क्या मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों का असर सिर्फ आम जनता के लिए है, नगर निगम जोन-1 के लिए नहीं ?वीवीआईपी इलाकों में किसकी शह पर अवैध दुकानें और सड़क पर खुले गैरेज चल रहे हैं ? क्या लखनऊ नगर निगम केवल कागजी अभियानों तक सीमित रहेगा या इन अतिक्रमणकारियों पर असल में कोई ठोस कार्रवाई होगी ?
