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लखनऊः यूपी में 11 विधान परिषद सीटों पर चुनाव की घोषणारू शिक्षित वर्ग और शिक्षकों के बीच ताकत आजमाने का सियासी मंच तैयार


लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में उच्च सदन (विधान परिषद) का समीकरण बदलने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य में खाली हो रही शिक्षक एवं स्नातक कोटे की 11 विधान परिषद सीटों के लिए निर्वाचन आयोग ने चुनाव की औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है।

चुनावी कार्यक्रम अंतर्गत नामांकन की अंतिम तिथिरू 6 अक्टूबर,मतदान की तारीखरू 23 अक्टूबर,मतगणना व परिणामरू 27 अक्टूबर को होगा।

जिन विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल आगामी 6 दिसंबर को समाप्त हो रहा है, उनमें अवनीश कुमार सिंह, आशुतोष सिन्हा, मानवेन्द्र प्रताप सिंह, दिनेश गोयल, मान सिंह यादव, उमेश द्विवेदी, लाल बिहारी यादव, आकाश अग्रवाल, हरि सिंह ढिल्लो, ध्रुव कुमार त्रिपाठी और श्रीचंद्र शर्मा शामिल हैं।

शिक्षक और स्नातक क्षेत्र के ये चुनाव आम विधानसभा या लोकसभा चुनावों से काफी अलग होते हैं। इनमें केवल स्नातक और शिक्षक श्रेणी के पंजीकृत मतदाता ही अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं।

यह चुनाव उत्तर प्रदेश के शिक्षित, मध्यमवर्ग, शिक्षकों और युवाओं (स्नातकों) के बीच राजनीतिक पार्टियों की साख और पकड़ का सीधा टेस्ट होता है। सरकार की नीतियों, रोजगार, पुरानी पेंशन योजना और शिक्षा क्षेत्र के मुद्दों पर प्रबुद्ध वर्ग क्या सोचता है, इसके नतीजे 27 अक्टूबर को स्पष्ट हो जाएंगे।

इन 11 सीटों में से वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के पास 6 सीटें, समाजवादी पार्टी के पास 3 सीटें, जबकि शिक्षक दल और निर्दलीय के पास 1-1 सीट है।

सत्तारूढ़ भाजपा ने उच्च सदन में अपनी पूर्ण बढ़त बनाए रखने के लिए अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है और कई सीटों पर वर्तमान विधान पार्षदों पर ही फिर से भरोसा जताया है। समाजवादी पार्टी इस चुनाव के जरिए शिक्षक और युवा स्नातकों को साधकर अपना आधार बढ़ाने और विधान परिषद में अपना संख्या बल मजबूत करने की कोशिश करेगी।

एमएलसी चुनावों में हमेशा से गैर-राजनीतिक शिक्षक गुटों और निर्दलीय उम्मीदवारों का खासा प्रभाव रहा है। ध्रुव कुमार त्रिपाठी और आकाश अग्रवाल जैसे चेहरों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दलगत राजनीति से इतर शिक्षक वर्ग एक बार फिर अपने स्वतंत्र प्रतिनिधियों को तरजीह देता है या राजनीतिक दल इस किले को भेद पाते हैं।

23 अक्टूबर को होने जा रही यह वोटिंग न केवल 11 सदस्यों के भविष्य का फैसला करेगी, बल्कि यह यूपी के पढ़े-लिखे तबके और शिक्षकों के राजनीतिक रुझान की दिशा भी तय करेगी।

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