घटिया निर्माण, बार-बार ब्रेकडाउन और अधिकारियों की उदासीनता से बढ़ी परेशानीय पयागीपुर से सप्लाई बहाल करने की उठी मांग
लम्भुआ/ सुलतानपुर। लम्भुआ, चांदा, कोइरीपुर और आसपास के हजारों उपभोक्ता पिछले करीब तीन वर्षों से 33 केवी विद्युत लाइन की बदहाली का खामियाजा भुगत रहे हैं। लोगों का आरोप है कि जिस लाइन को पहले पयागीपुर पावर स्टेशन से संचालित किया जाता था, उसे अब राजवाड़े रामपुर स्थित 132 केवी उपकेंद्र से जोड़े जाने के बाद बिजली व्यवस्था लगातार चरमरा गई है। हालत यह है कि महीने में करीब 10 दिन तक ब्रेकडाउन बना रहता है और उपभोक्ताओं को भारी बिजली बिल देने के बावजूद पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल रही।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुलतानपुर से संचालित होने के दौरान इस लाइन में शायद ही कोई बड़ी समस्या आती थी। उस समय केवल लोहरामऊ रेलवे क्रॉसिंग के पास एक केबल बॉक्स के माध्यम से लाइन इस पार से उस पार जोड़ी गई थी। संचालन बंद होने के बाद दोमुहवा नहर के पास अराजक तत्वों ने केबल उतार दी, जिससे वैकल्पिक आपूर्ति की व्यवस्था भी खत्म हो गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि लाइन निर्माण में कई स्थानों पर केबल और अन्य सामग्री की गुणवत्ता भी खराब रही। समय पर पेड़ों की कटिंग नहीं होने से हल्की बारिश और हवा में भी फॉल्ट हो जाता है। संविदा कर्मचारियों और संविदा अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
जानकारों के अनुसार धनुपुरवा उपकेंद्र से इस 33 केवी लाइन को जोड़ने की तकनीकी व्यवस्था मौजूद है, लेकिन अतिरिक्त लोड का हवाला देकर सप्लाई नहीं दी जाती। जबकि पयागीपुर पावर स्टेशन से लाइन को दोबारा जोड़ने में महज एक से डेढ़ घंटे का समय लग सकता है। इससे लम्भुआ, चांदा और कोइरीपुर क्षेत्र को बड़ी राहत मिल सकती है।
सबसे गंभीर समस्या तब सामने आती है जब 33 केवी लाइन में फॉल्ट के बाद सप्लाई बहाल करनी होती है। नियम के अनुसार मेगर टेस्ट के बिना लाइन चालू नहीं की जाती। यदि वितरण खंड का जूनियर इंजीनियर मौजूद नहीं है तो लाइनमैन सप्लाई चालू नहीं कर पाते। आरोप है कि राजवाड़े रामपुर का स्टाफ भी मेगर टेस्ट करने से मना कर देता है और जेई के आने का इंतजार कराया जाता है, जिससे घंटों और कई बार पूरे दिन बिजली बाधित रहती है।
राजवाड़े रामपुर से गारवपुर तक नई 33 केवी लाइन का निर्माण पिछले एक वर्ष से चल रहा है, लेकिन आज तक पूरा नहीं हो सका। स्थानीय लोगों ने विद्युत विभाग से अधूरे कार्य को शीघ्र पूरा करने, पयागीपुर से वैकल्पिक सप्लाई बहाल करने और लगातार हो रहे ब्रेकडाउन की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो क्षेत्र की जनता को बिजली संकट से राहत मिलना मुश्किल होगा।
