बलिया। सरयू की बाढ़ ने मुरली छपरा विकासखंड की चांददीयर पंचायत की करीब 10 हजार आबादी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बैजनाथ बाबा का डेरा और पियारी टोला में करीब 750 लोग पिछले 15 दिनों से बाढ़ की चपेट में हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभावित इलाकों तक पर्याप्त राहत नहीं पहुंच रही है। आवागमन के लिए महज एक नाव उपलब्ध है, जबकि बिजली और मोबाइल चार्जिंग की समस्या के चलते कई परिवार रात में मोबाइल की रोशनी में खाना पकाने को मजबूर हैं।
बाढ़ पीड़ित प्रभुनाथ यादव, नकुल यादव, संदेश कुमार यादव, रामसहन यादव और मुन्ना यादव आदि ने बताया कि पानी से घिरे होने के कारण रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो गई है। जिन परिवारों के पास मोबाइल चार्ज करने की सुविधा नहीं है, उन्हें बकुल्हा रेलवे स्टेशन तक जाना पड़ रहा है। कई परिवार घर छोड़कर रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को भी मजबूर हैं।
तहसील स्तर से राहत के रूप में राशन किट का वितरण शुरू किया गया है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कई प्रभावित परिवारों तक अब तक राहत सामग्री नहीं पहुंची है। ग्रामीणों ने वितरण में भी मनमानी का आरोप लगाया है।
लगातार बाढ़ के पानी में रहने और उसमें आवागमन करने के कारण ग्रामीणों में सर्दी, बुखार समेत अन्य बीमारियों की शिकायत सामने आ रही है। दूसरी ओर, मवेशियों के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था नहीं होने से पशुपालक भी परेशान हैं। ग्रामीण किसी तरह अपने पशुओं के लिए चारे का इंतजाम कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ उनकी जिंदगी को मुश्किल बना देती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते। उन्होंने प्रशासन से पर्याप्त नाव, राहत सामग्री, पशु चारा और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुरली छपरा की चिकित्साधिकारी डॉ. देवनीति ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की स्थिति को देखते हुए चांददीयर चैराहे और बकुल्हा पुराने रेलवे स्टेशन पर स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं। शिविर में आने वाले मरीजों का समुचित उपचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि रविवार से स्वास्थ्य परीक्षण और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने वाली एंबुलेंस भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में घूम-घूमकर लोगों का उपचार करेगी।
चांददीयर पंचायत के बैजनाथ बाबा का डेरा और पियारी टोला के ग्रामीण बाढ़ के दौरान पुरानी रेलवे लाइन को सुरक्षित ऊंचे स्थान के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में ग्रामीण अपने परिजनों और मवेशियों के साथ यहां शरण लिए हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब एक किलोमीटर के दायरे में पुरानी रेलवे लाइन को जगह-जगह काटकर आर-पार रास्ते बना दिए गए हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक यदि सरयू का जलस्तर फिर बढ़ता है तो इन कटे स्थानों से पानी तेजी से रेलवे लाइन के दूसरी ओर पहुंच सकता है। इससे पुराने रेलवे बांध पर खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने समय रहते इन कटे स्थानों को बंद कराने और रेलवे लाइन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि बांध टूटने की स्थिति में चांददीयर समेत आसपास का बड़ा क्षेत्र जलमग्न हो सकता है।
