सोनभद्र। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय, सोनभद्र द्वारा राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उदितपुर सुर्रा एवं रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर नशामुक्ति, पवित्रता और श्रेष्ठ जीवन का संदेश दिया गया। इस दौरान कुल 110 लोगों को राखी बांधकर समाज में सकारात्मक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया गया।
विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में 85 विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को राखी बांधी गई। मुख्य संचालिका ब्रह्माकुमारी सुमन दीदी ने रक्षाबंधन के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि स्वयं को बुराइयों और विकारों से मुक्त करने का पवित्र संकल्प है। उन्होंने विद्यार्थियों को नशे से दूर रहकर श्रेष्ठ चरित्र और संस्कारों को अपनाने की प्रेरणा दी।
वहीं कोतवाली में 25 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राखी बांधकर उनके प्रति सम्मान और शुभकामनाएं व्यक्त की गईं। इस अवसर पर पुलिसकर्मियों को समाज को नशा और अन्य बुराइयों से मुक्त कराने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में बताया गया कि ब्रह्माकुमारी बहनें रक्षाबंधन पर किसी प्रकार का उपहार स्वीकार नहीं करतीं। उनके लिए सबसे बड़ा उपहार यह है कि लोग अपने जीवन की किसी कमी, कमजोरी, विकार अथवा मादक पदार्थों के सेवन को छोड़ने का संकल्प लें। इसी उद्देश्य से उपस्थित लोगों से संकल्प पत्र भरवाकर बुराइयों का त्याग करने और श्रेष्ठ जीवन अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
इस दौरान क्रोध, अहंकार, लोभ, मोह, ईर्ष्या एवं नशे जैसी बुराइयों का त्याग कर प्रेम, शांति, पवित्रता, अनुशासन, करुणा, सद्भावना और मधुरता जैसे श्रेष्ठ गुणों को जीवन में धारण करने का संदेश दिया गया। ब्रह्माकुमारी सुमन दीदी ने कहा कि रक्षाबंधन का वास्तविक संदेश "बुराइयों का दान, श्रेष्ठ गुणों का धारण और नशामुक्त जीवन का संकल्प" है।
कार्यक्रम में थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह ने ब्रह्माकुमारी संस्था के मानव सेवा कार्यों की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर निरीक्षक डी.एन. यादव, निरीक्षक बनारसी यादव, उपनिरीक्षक रामअवध, योगेंद्र पांडेय, रणजीत सिंह, हेड कांस्टेबल धनेश यादव, सत्येंद्र, महिला हेड कांस्टेबल पम्मी, कांस्टेबल पूजा एवं महिला कांस्टेबल सुमनलता सहित अन्य पुलिसकर्मी उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में बीके सीता, बीके कविता एवं गायत्री बहन का विशेष योगदान रहा।
