प्रतापगढ़/कुंडा। कुंडा तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार और बदहाल व्यवस्थाओं के खिलाफ अधिवक्ताओं का आक्रोश एकदम चरम स्तर पर पहुँच गया है। तहसील की कार्यप्रणाली और अव्यवस्थाओं से नाराज अधिवक्ताओं ने रवि कुमार श्रीवास्तव की अगुवाई में आमरण आंदोलन शुरू कर दिया है। आंदोलन में महामंत्री योगेश तिवारी, दयाशंकर मिश्र, श्याम कृष्ण पांडेय, अखिलेश सरोज, सिद्धनाथ सरोज, चंद्रपाल मौर्य, प्रदीप ओझा, अमन केसरवानी और कौशलेश पांडेय समेत अन्य अधिवक्ता भी शामिल हैं।
अधिवक्ताओं का कहना है कि तहसील में आम लोगों और अधिवक्ताओं के लिए बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। पेयजल की व्यवस्था बदहाल है तो सफाई व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। तहसील परिसर में आने वाले फरियादियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है। दूसरी ओर नामांतरण वादों का समय से निस्तारण नहीं होने के कारण ग्रामीणों को महीनों तक तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
अधिवक्ताओं ने तहसील में चल रही कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के चलते आम फरियादी परेशान हैं। जरूरी राजस्व मामलों के निस्तारण में लगातार देरी से लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अधिवक्ताओं का आरोप है कि तहसील में काम कराने के लिए आने वाले लोगों को व्यवस्था की खामियों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि पेयजल, सफाई, लंबित नामांतरण वादों के निस्तारण और तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार पर प्रभावी कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा। अधिवक्ताओं के आमरण आंदोलन से तहसील प्रशासन में खलबली मच गई है। अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह आंदोलनकारियों की मांगों का समाधान करता है या फिर आंदोलन और तेज होगा।
