लखनऊ। प्रदेश की राजधानी के सबसे पॉश इलाके गोमती नगर में स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान खुद गंभीर बीमारी के दौर से गुजर रहा है। जिस अस्पताल के भरोसे पूरा प्रदेश सांस ले रहा है, उसी संस्थान के आईसीयू (क्रिटिकल यूनिट) के ठीक बाहर सीवर लाइन टूट जाने से बदबूदार पानी का समंदर भर गया है। स्थिति यह है कि अपनी जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे आईसीयू के मरीजों और उनके तीमारदारों को इलाज से पहले श्प्रशासनिक सड़ांधश् का सामना करना पड़ रहा है।
लखनऊ नगर निगम जोन 4 के अंतर्गत आने वाले इस परिसर की बदहाली ने न केवल नगर निगम के दावों की धज्जियां उड़ाई हैं, बल्कि अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता का भी ढोल पीट दिया है।
अस्पताल का आईसीयू वह जगह मानी जाती है जहाँ साफ-सफाई के मानक सबसे सख्त होने चाहिए ताकि मरीजों को किसी भी तरह के सेकेंडरी इंफेक्शन से बचाया जा सके। लेकिन लोहिया संस्थान में नियम शायद उल्टे चलते हैं। क्रिटिकल यूनिट के बिल्कुल मुहाने पर बहता सीवर का बदबूदार पानी चीख-चीखकर गवाही दे रहा है कि यहाँ मरीजों को रिकवरी कम और इंफेक्शन का खतरा ज्यादा है। तीमारदार जहाँ अपने मरीज की एक-एक सांस के लिए दुआ मांग रहे हैं, वहीं इस भीषण बदबू में खुद उनका सांस लेना दूभर हो गया है।
लखनऊ को श्स्मार्ट सिटीश् बनाने का ढिंढोरा पीटने वाला नगर निगम और करोड़ों का बजट डकारने वाला लोहिया अस्पताल प्रशासन, दोनों ही इस गंभीर समस्या पर कुंभकर्णी नींद में सोए हैं। कई घंटों से टूटी सीवर लाइन और लगातार भर रहे गंदे पानी ने तीमारदारों के साथ-साथ यहाँ तैनात डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ का भी जीना मुहाल कर रखा है। सवाल उठता है कि जब राजधानी के सबसे प्रमुख मेडिकल संस्थानों में से एक का यह हाल है, तो आम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का क्या ही कहना?
हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर खतरे के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ने में लगे हैं।
क्या नगर निगम जोन 4 की टीम को तब तक बदबू महसूस नहीं होगी जब तक पानी उनके दफ्तरों में न घुस जाए? क्या अस्पताल प्रशासन किसी बड़े हादसे या मरीजों में नया संक्रमण फैलने का इंतजार कर रहा है? क्या स्वास्थ्य महकमे के बड़े आकाओं की गाड़ियां इस रास्ते से गुजरते वक्त खिड़कियों के साथ अपनी आंखें भी बंद कर लेती हैं?
जीवन बचाने वाले संस्थान की दहलीज पर इस तरह सीवर का बहना सिर्फ एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि प्रशासनिक लाचारी और घोर बेपरवाही का प्रतीक है। अगर जल्द ही इस टूटी सीवर लाइन को ठीक कर परिसर को संक्रमण मुक्त नहीं कराया गया, तो यह श्क्रिटिकल यूनिटश् के मरीजों के स्वास्थ्य पर सीधे तौर पर डाका डालने जैसा होगा।
