लखनऊ। सड़क सुरक्षा-जीवन रक्षा के बड़े-बड़े विज्ञापनों और नारों की असली हकीकत देखनी हो, तो कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं है। उत्तर प्रदेश की सत्ता के सबसे बड़े केंद्र श्विधान भवनश् (गेट नंबर 5) के ठीक सामने आ जाइए। जिस सड़क से सूबे के दिग्गज जनप्रतिनिधि, वीवीआईपी और आला अफसर दिन में दस बार सायरन बजाते हुए गुजरते हैं, उसी अति-विशिष्ट मार्ग पर पिछले 15 दिनों से वाटर पाइपलाइन अपना श्दुखश् बहा रही है। सड़क पर बना गड्ढा और भरा हुआ पानी मानो चीख-चीखकर जलकल विभाग और पीडब्ल्यूडी के शानदार काम की गवाही दे रहा है।
रोज हजारों लीटर शुद्ध पीने का पानी सड़क पर बहकर नालियों में जा रहा है। आम जनता को जब एक-एक बूंद पानी सहेजने और सड़क सुरक्षा का ज्ञान बांटा जाता है, तब प्रशासन का खुद का रवैया यह दर्शाता है कि उन्होंने शायद श्जल ही जीवन हैश् का कुछ ज्यादा ही व्यावहारिक और अनूठा मतलब निकाल लिया हैकृजल सड़क पर बहेगा, तभी तो गड्डा गहरा होगा!
विधान भवन के ठीक सामने जलभराव और गड्ढों के बीच से रोज जनता अपनी जान जोखिम में डालकर गाड़ियां निकाल रही है, लेकिन साहब लोगों की चमचमाती गाड़ियों के शीशे इतने काले और एयरकंडीशन इतने ठंडे हैं कि बाहर का यह श्खौफनाक सीनश् उन्हें नजर ही नहीं आता।
हैरानी की बात यह है कि पिछले 15 दिनों से जारी इस तमाशे पर न तो जलकल विभाग की नींद टूटी है और न ही लोक निर्माण विभाग के क्षेत्रीय अभियंताओं की तंद्रा भंगी हुई है।
जलकल विभाग शायद इस बात के इंतजार में है कि जब पूरी पाइपलाइन खुद-ब-खुद बह जाएगी, तब मरम्मत का बड़ा बजट पास कराया जाएगा। लोक निर्माण विभाग ष्सड़क सुरक्षाष् के स्लोगन लिखकर फुर्सत में आ चुका है। उनके जिम्मेदार अभियंताओं को शायद लगता है कि सड़क पर पानी का जमाव और जानलेवा गड्ढे ही असली श्रोड सेफ्टीश् का टेस्ट हैं !
जब प्रदेश के सबसे हाई-प्रोफाइल और सुरक्षा के लिहाज से सबसे संवेदनशील माने जाने वाले श्विधान भवनश् के गेट के सामने प्रशासन का यह रवैया है, तो लखनऊ के आम इलाकों की बदहाली का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। कागजों में स्मार्ट सिटी का ढिंढोरा पीटने वाली अफसरशाही की नाक के ठीक नीचे 15 दिनों से जारी यह लापरवाही प्रशासनिक संवेदनहीनता का सबसे बड़ा सबूत है।
अब देखना यह है कि सोशल मीडिया पर वायरल होते इस श्शानदार सीनश् के बाद जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुलती है या फिर विधान भवन के सामने का यह श्छोटा ताल-तलैयाश् यूं ही जनता के लिए मुसीबत और विभागों की नाकामी का गवाह बना रहेगा।
