बताया जा रहा है कि अनियंत्रित स्विफ्ट डिजायर कार ने सड़क पर कई वाहनों को टक्कर मार दी। इसके बाद कार एक दुकान में घुसने की कोशिश करने लगी। घटना के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई। कार सवार दोनों युवकों ने भागने की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित लोगों ने उन्हें पकड़ लिया और जमकर पिटाई कर दी। भीड़ ने दोनों युवकों के कपड़े तक फाड़ दिए। उनकी कार को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
सूचना मिलते ही डायल-112 की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस जब दोनों युवकों को भीड़ से निकालने की कोशिश करने लगी, तो एक युवक ने पुलिसकर्मियों से भी हाथापाई शुरू कर दी। इस दौरान पुलिस और भीड़ के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। काफी मशक्कत के बाद पुलिस दोनों घायल युवकों को भीड़ से निकालकर फुलवारी शरीफ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई।
फुलवारी शरीफ थाना प्रभारी गुलाम शाहबाज आलम के मुताबिक, कार में रंजीत कुमार और रंजीत चौहान सवार थे। पुलिस के अनुसार, दोनों शराब के अत्यधिक नशे में थे। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई में जुटी है।
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि शराबबंदी के बावजूद शराब कहां से मिली? आखिर इन युवकों तक शराब पहुंची कैसे? अगर शराब की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध है, तो शराब की उपलब्धता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। नशे में वाहन चलाना न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि इससे सड़क पर चल रहे आम लोगों की जान भी खतरे में पड़ती है। बिहार की राजधानी पटना की इस घटना ने एक बार फिर शराबबंदी, नशे में ड्राइविंग और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
