Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS
ऑनलाइन भुगतान करें
Pay Now

मुसलमान सिर्फ एक अल्लाह की इबादत करता है-मौलाना मदनी


वंदे मातरम् बिल के संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद देश में सियासी बहस तेज हो गई है। लोकसभा और राज्यसभा में बिल को मंजूरी मिलने के बाद अब यह मुद्दा हिंदू-मुस्लिम बहस के केंद्र में आ गया है। मुस्लिम संगठनों ने इस बिल पर सवाल उठाते हुए इसे संविधान में दिए गए धार्मिक अधिकारों के खिलाफ बताया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) और जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने बिल का विरोध किया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने बिल के कुछ हिस्सों को लेकर आपत्ति जताई है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने कहा कि मुसलमानों को किसी के वंदे मातरम् पढ़ने या गाने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उनकी धार्मिक मान्यताएं कुछ अलग हैं।

मदनी ने कहा कि वंदे मातरम् के कुछ हिस्से इस्लामी आस्था के अनुरूप नहीं हैं, इसलिए किसी भी मुसलमान को इसे गाने या स्वीकार करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

मदनी ने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता और अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है। साथ ही उन्होंने अनुच्छेद 19 का जिक्र करते हुए कहा कि यह नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है। मदनी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को उसके धार्मिक विश्वास के खिलाफ किसी नारे, गीत या विचार को अपनाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से जारी बयान में कहा गया कि वंदे मातरम् को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाना धार्मिक और संवैधानिक स्वतंत्रता पर हमला है। बोर्ड ने कहा कि किसी विशेष धार्मिक विचार या मान्यता को देश के सभी नागरिकों पर लागू नहीं किया जा सकता।

वंदे मातरम् बिल 29 जुलाई को राज्यसभा और 30 जुलाई को लोकसभा से पास हुआ है। अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा। इस कानून के बाद राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को राष्ट्रगान जन गण मन की तरह कानूनी सुरक्षा मिलने का प्रावधान है। प्रावधानों के अनुसार, वंदे मातरम् के गायन के दौरान अपमान करने, रुकावट डालने या जानबूझकर बाधा पहुंचाने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। बता दें कि इसके पहले मौलाना मदनी ने सरकार से वक्फ पर संविधान के सिद्धांत बनाए रखने की अपील की थी।

बिल का विरोध करने वाले मुस्लिम नेता और धार्मिक संगठनों का कहना है कि इसे लागू करना धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को प्रभावित कर सकता है।

मुस्लिम नेताओं और मौलानाओं का आरोप है कि यह बिल मुसलमानों को निशाना बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। वहीं, बिल के समर्थकों का कहना है कि इसका उद्देश्य राष्ट्रीय गीत को सम्मान और कानूनी संरक्षण देना है। बता दें कि वंदे मातरम् बिल अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। इसके बाद ही यह तय होगा कि यह कानून के रूप में कब लागू होगा।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |