लखनऊ। लखनऊ जिले के बख्शी का तालाब कठवारा गांव गोमती नदी तट पर स्थित मां चंद्रिका देवी मंदिर परिसर में माँ चंद्रिका देवी मंदिर, यात्री विश्राम गृह 26 अगस्त 2026 की सुबह माँ चंद्रिका देवी मंदिर परिसर का वातावरण सामान्य दिनों से कुछ अलग दिखाई दे रहा था, धार्मिक आस्था से जुड़े इस स्थल पर उस दिन श्रद्धा, स्मृति, साहित्य और सामाजिक सहभागिता का एक अनूठा संगम दिखाई दिया। इस अवसर स्मृति शेष भगवती सिंह जी की 94वीं जयंती समारोह आयोजन माँ चंद्रिका देवी मेला विकास समिति द्वारा किया गया। वहीं मंदिर परिसर में आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के बीच समारोह की तैयारियाँ स्पष्ट दिखाई दे रही थीं। यात्री विश्राम गृह आयोजन का प्रमुख केंद्र बना हुआ था,धार्मिक स्थल का यह स्थान उस दिन केवल पूजा और दर्शन का केंद्र नहीं रहा, बल्कि सामाजिक स्मृति और सामुदायिक सहभागिता के एक सार्वजनिक मंच में परिवर्तित हो गया। इस आयोजन और समिति की भूमिका समारोह के आयोजन में माँ चंद्रिका देवी मेला विकास समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समिति के संरक्षक माननीय पवन सिंह चैहान, अध्यक्ष अखिलेश सिंह चैहान, महामंत्री अनुराग तिवारी ‘अन्नू’, उपाध्यक्ष कृष्ण पाल सिंह चैहान, उपाध्यक्ष रवींद्र सिंह ‘बबलू’, कोषाध्यक्ष अर्जुन सिंह, ऑडिटर डॉ एस के सिंह चैहान, संयुक्त मंत्री रामकृपाल सिंह तथा प्रभारी (निर्माण कार्य) पंडित नंद किशोर शर्मा (डीयम महाराज) की उपस्थिति एवं सहभागिता आयोजन की संस्थागत संरचना को दर्शाती रही। समिति के सदस्यगण रणवीर सिंह, राजाबख्श सिंह, बेनी माधव सिंह, विपिन सिंह ‘मोनू’, अभिनन्दन सिंह, जितेंद्र सिंह ‘कल्लू’, जसवीर सिंह, शिवशंकर श्रीवास्तव, शिव प्रसाद सिंह ‘भैयन’, रत्नेश सिंह, ज्वाला सिंह, गिरिजा श्रीवास्तव, बृजमोहन, आशीष सिंह चैहान तथा गुरूबख्श सिंह भी आयोजन से जुड़े रहे।
समारोह में इन लोगों की भागीदारी केवल एक औपचारिक प्रशासनिक भूमिका के रूप में नहीं दिखाई देती, बल्कि यह स्थानीय सामुदायिक संगठन की सक्रियता का उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। स्वं भगवती सिंह जी की 94वीं जयंती आयोजन सामाजिक स्मृति को वर्तमान पीढ़ी से जोड़ने का कार्य करते हैं। किसी स्थानीय अथवा सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण व्यक्ति की स्मृति जब सार्वजनिक स्थल पर सामूहिक रूप से मनाई जाती है, तो वह व्यक्तिगत स्मृति से आगे बढ़कर सामूहिक स्मृति का रूप ग्रहण कर लेती है। माँ चंद्रिका देवी मंदिर जैसे धार्मिक स्थल पर इस प्रकार का आयोजन विशेष समाजशास्त्रीय महत्व रखता है।
